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सदक़ा करने के फायदे (Benefits Of Sadqa)

सदक़ा करने के फायदे (Benefits Of Sadqa)

किताबों में आया हैं की एक बार हज़रत बीबी फ़ातिमा बीमार हो गयी I हज़रत अली शेरे खुदा आपके पास आये तो आपने उनसे पूछा- आपको किसी चीज़ के खाने की ख्वाहिशें हो तो बताओ? बीबी फ़ातिमा ने फ़रमाया ! इस वक़्त मेरा अनार खाने का मन कर रहा हैंI बीबी फ़ातिमा की ख़्वाहिश सुनकर हज़रत अली दिल ही दिल में तड़प उठेI क्यूंकि उनके पास अनार खरीदने के पैसे नहीं थेI बहरहाल आप बहार निकले और किसी तरह पैसो का इंतेज़ाम करके बाजार पहुंचे और एक अनार खरीद कर घर की तरफ लौट ही रहे थे की रास्ते में एक फ़क़ीर मिला I जिसके दोनों हाथ नहीं थे और वह काफी बीमार लग रहा थाI उस फ़क़ीर को देख कर आप ठहर गएI फ़क़ीर के पास रुकते ही उस फ़क़ीर ने वह अनार खाने के ख़्वाहिश की I उस वक़्त हज़रत अली सोच में पड़ गए की यह अनार तो वह अपनी बीवी हज़रत फ़ातिमा के लिए ले जा रहे थे और यह फ़क़ीर भी अब यह अनार मांग रहा हैं I

आपने उस वक़्त उस बीमार फ़क़ीर को मायूस करना मुनासिब नहीं समझा और वह अनार उसे अपने हाथो से खिला दिया I वह बीमार फ़क़ीर आपसे बड़ा खुश हुआ I जिसकी ख़ुशी देखकर आपको भी बड़ा सुकून मिला I खाली हाथ दिल में न जाने क्या क्या सोचते हुए आप घर पहुंचे तो आपने देखा की बीबी फ़ातिमा बिलकुल ठीक होकर आराम से बैठी हुई हैं I आपने बाजार जाने और वापिस आने का सारा हाल बीबी फ़ातिमा को सुनाया तो आपने तसल्ली देते हुए फ़रमाया ! आपको घबराने की ज़रूरत नहीं I उधर आपने मेरे लिए ख़रीदा अनार उस बीमार को खिलाया और इधर अल्लाह ने मुझे सेहत अता फरमा दी, अब मेरे दिल में अनार खाने की तमन्ना ही न रही ये सब सुनकर हज़रत अली बड़े खुश हुए I

इतने में किसी ने दरवाज़े पर दस्तक दी हज़रत अली ने पूछा कौन? बाहर से जवाब मिला सलमान फ़ारसी I  आपने दरवाज़ा खोला तो देखा की हज़रत सलमान कपड़े से ढका हुआ एक थाल लेकर हाज़िर हैंI हज़रत अली ने पूछा यह क्या हैं? और यह कहाँ से आया है? हज़रत सलमान ने जवाब दिया अल्लाह की तरफ से रसूले खुदा की खिदमत में आया था और अल्लाह के रसूल ने इसे हदिया के तौर पर आपके पास भेजा हैंI आपने कपडा उठा कर देखा तो उसमे नौ अनार थे I हज़रत अली ने फ़रमाया अगर यह हदिया अल्लाह की तरफ से आया होता तो इस में दस अनार होते क्यूंकि अल्लाह पाक एक के बदले कम से कम दस तो अता फरमाता ही हैंI आपकी यह बात सुनकर हज़रत सलमान मुस्कुरा दिए और अपनी आस्तीन में छुपाया एक और अनार थाल में रखते हुए फ़रमाया - हज़रत अली ! मैने आपको आज़माने के लिए ऐसा किया था I

सदक़ा एक नेअमत हैं I यह बहुत सारी बालाओं को टाल देता हैं I इसलिए सदक़ा करते रहने चाहिए I अल्लाह पाक बड़ा रहीम व करीम हैं वह अपने बन्दों को उनकी नेकियों का सवाब बढ़ा चढ़ा कर अता फरमाता हैं शर्त यही हैं की नियत अच्छी हो I हम जो कुछ भी करे या दे वह अल्लाह की रज़ा के लिए करे ताकि हमें हमारी नेकियों का भरपूर सवाब मिले और अल्लाह पाक भी राज़ी हो जाये I 

ग़ुस्ल करने का तरीक़ा (Gusl Ka Tarika in Hindi)

 ग़ुस्ल करने का तरीक़ा (Gusl Ka Tarika in Hindi)

इस्लाम पाक व साफ़ मज़हब हैं। वह पाकीज़गी को पसंद करता हैं। जहाँ क़ुरान व हदीस में रूह को पाक व साफ़ करने रखने के तरीके बताये गए हैं, वही बदन को भी पाक साफ़ रखने की सख्त ताकीद आयी हैं। बदन को साफ़ पाक रखना भी ईमान का एक अहम हिस्सा हैं, क्यूंकि बदन की पाकी के बिना कोई इबादत अदा व मकबूल नहीं हो सकती।

पाकी नापाकी के सिलसिले में सही जानकारी न होने की वजह से अक्सर लोग बहुत सी नेकियों से महरूम रह जाते हैं। आपने खुद सुना होगा की किसी को नमाज़ के लिए मस्जिद चलने के लिए कहा तो जवाब मिला अरे साहब ! चलता तो ज़रूर लेकिन क्या करुँ नापाक हो गया हूँ। कपड़ो पर छींटे लग गए हैं। मालूम होना चाहिए की नापाक पानी या पेशाब के छींटे लगने से आदमी ऐसा नापाक नहीं हो जाता की वह नहाये बिना नमाज़ नहीं पढ़ सकता। ऐसा आदमी बदन या कपड़े पर लगे छींटो को धोकर पाक हो जायेगा। नहाने की ज़रूरत नहीं सोचिये छोटी सी नादानी से कितना बड़ा नुकसान होगा।

हाँ ग़ुस्ल करना बेहद ज़रूरी हैं सवाल आता हैं कब? जवाब हैं हमबिस्तरी के बाद, या एहतलाम हो जाने पर इसी तरह औरत जब माहवारी से फ़ारिग़ हो जाये तब नहाना वाजिब हो जाता हैं। ऐसा ग़ुस्ल वाजिब हो जाये तो सबसे पहले यह ध्यान रहे की नापाक कपडा पहन कर हरगिज़ न नहाये बल्कि उसे उतर कर पाक कर ले। बदन पर जहाँ नापाकी लगी हैं, उसे अच्छी तरह धो डालें इसी तरह अगर पेशाब करने के बाद पानी से पाकी नहीं हासिल की हैं तो वह चड्डी, पायजामा, लुंगी या पेंट पहन कर न नहाये। उसे धोकर पाक कर ले वर्ना उसकी नापाकी पानी के साथ फैल कर पुरे बदन तक पहुँच जाएगी।

पाकी हासिल करने और पाक होने की नियत से ग़ुस्ल करे। सबसे पहले दोनों हाथ कलाइयों तक अच्छी तरह धो ले, बदन पर लगी नापाकी दूर कर ले और तीन बार इस तरह कुल्ली करे की पानी हलक तक पहुँच जाये। इसी तरह तीन बार नाक के अंदर पानी डालकर हल्की साँस से ऊपर खींचे की पानी नाक की ऊपरी हड्डी तक पहुँच जाये। वहां पानी पहुंचाकर निकाले अगर लापरवाही बरती और पानी ऊपर तक नहीं चढ़ाया तो फिर ग़ुस्ल नहीं होगा।

कुल्ली करने और नाक में पानी चढ़ाने के बाद वज़ू कर ले और फिर बदन पर पानी डालें। पहले दाहिने तरफ फिर बायीं तरफ पानी डालकर मले और इतना ध्यान रखे की बाल बराबर भी जगह कही सुखी न रहने पाए। सर व दाढ़ी के बालो की जड़ो तक पानी पहुँचाना फ़र्ज़ हैं। सर्दियों में खास ध्यान रखे क्यूंकि पानी बड़ी मुश्किल से अंदर पहुँचता हैं। इसी तरह पाँव की अंगुलियां और नाफ में अंगुली घुमा कर पानी पहुंचाए। औरतो को चाहिए की नहाते वक़्त अपने कान व नाक के ज़ेवरों को घुमा लिया करे ताकि पानी सुराख़ में पहुँच जाये वर्ना पाक नहीं होगी।

एक बार बदन गीला करने के बाद साबुन वगैरह लगा कर फिर पुरे बदन पर पानी बहाये ताकि साबुन वगैरह धुल कर साफ़ हो जाये और फिर आखिर में मैल वगैरह छुड़ा कर पुरे बदन पर पानी बहाये। इस तरह बहाये की बदन के हर हर हिस्से से बहकर निचे गिर जाये। बदन से पानी बाह जाना ज़रूरी हैं। बदन गीला करना काफी नहीं।

एक बात का ध्यान रखे, ऐसी जगह बैठ कर न नहाये जहाँ ग़ुस्ल का पानी जमा हो जाता हैं। कुछ ऊँची जगह होनी चाहिए ताकि पानी बह जाया करे। इसी तरह अगर लोटे बाल्टी से नहा रहे हो तो इस बात का ख्याल रखे की पानी के छींटे बाल्टी में न पड़ने पाए वर्ना पानी नापाक हो जायेगा और वह पानी नहाने के काबिल नहीं रहेगा।

हमेशा पाक साफ़ रहने की कोशिश करे क्यूंकि अल्लाह पाक अपने बन्दों को पसंद फरमाता हैं जो पाक साफ़ रहते हैं।

पैगम्बर हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की कहानी (Story of Prophet Ibrahim)

पैगम्बर हज़रत इब्राहिम की कहानी (Story of Prophet Ibrahim)

बाबुल (ईरान का एक शहर) के लोग बुतों की पूजा किया करते थेI वहां आज़र नाम का एक आदमी बहुत खूबसूरत बुत बनाया करता थाI लोग उसकी बड़ी इज़्ज़त किया करते थेI उसके घराने में एक दिन एक लड़का पैदा हुआ I जिसका नाम इब्राहिम रखा गया I बच्चे की परवरिश एक अमीरज़ादे की हैसियत से होने लगी I बच्चा तेज़ी से बढ़ने लगा I बचपन से ही उसने अपने घर में मूर्तियों का कारखाना देखना शरू कर दिया I बच्चा कुछ बड़ा हुआ तो सोचने लगा यह सब क्या हैं?लोग इसका क्या करेंगे? कुछ और बड़ा होने पर पता चला की घर में बनने वाली यह मूर्तियां बुतखानो में पहुँच कर देवता बन जाती हैं I

फिर लोग इनकी पूजा करते हैं बच्चा सोचने लगा, हमारे घर में बनने वाली पत्थर की यह मूर्तियां देवता कैसे हो जाती हैं? चुनांचे एक दिन आपने घर वालो को उनके बारे में कुछ जानकारी हासिल करनी चाही तो जवाब मिला, अभी तुम छोटे हो यह बातें तुम्हारी समझ से बाहर हैंI यही हमारे बाप दादाओं का तरीका हैं, और हम भी उन्ही के तरीको पर अमल करते आ रहे हैंI फिर भी बच्चे यानि हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को तसल्ली नहीं हुई I

इसी तरह देखते सुनते बच्चा बड़ा हो गया I कोई उसे तसल्ली भरा जवाब न दे सका I उसने अपने दिल में सोचा मेरे ख्याल के मुताबिक अगर यह मूर्तियां देवता नहीं हैं, तो फिर दुनिया को पैदा करने वाला और मालिक कौन हैं? किसकी वजह से से ये पूरी कायनात चल रही हैं? इसी सोच में एक रात हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम घर से बाहर आये ऊपर नज़र डाली तो आसमान पर एक तारा बड़ा ज़ोरदार रौशनी बिखेरते हुए नज़र आया I आप सोचने लगे क्या यही खुदा हो सकता हैं? आप अभी कुछ फैसला न कर पाए की थोड़ी देर बाद चाँद निकल आया I उसकी रौशनी के आगे तारे की रौशनी काम पड़ गयी I आपने फिर सोचा क्या यह खुदा होगा? रात बीतती रही यहाँ तक की सुबह की सफेदी ज़ाहिर हुई और थोड़ी देर बाद सूरज निकल आया सूरज को देखकर आपने मन में सवाल किया, यह तो तारे और चाँद से भी ज़्यादा रौशनी वाला और ताकतवर नज़र आ रहा हैं, तो क्या यह खुदा होगा?

शाम होते होते सूरज की रौशनी भी कम हो गयी और सूरज डूब गया फिर आपने एलान फ़रमाया यह सब खुदा नहीं बल्कि खुदा की मखलूक हैंI  इन सबको पैदा करने वाला और सारे जहाँ का पालनहार ही खुदा हैंI मै उसी पर ईमान रखता हूँ, उसे ही अपना माबूद मानता हूँ I चाँद तारो और सूरज की पूजा करने वाले और उन्हें अपना खुदा मानने वाले गलत हैंI

इस तरह आप हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम हकीकत की जिस मंज़िल पर पहुँच चुके थे, और लोगो को भी वहाँ तक पहुँचाना चाहते थेI  फिर उन्होंने लोगो को एक खुदा के बारे में समझाना शुरू कर दिया, लेकिन लोग बिन देखे खुदा की इबादत करने के लिए राज़ी नहीं हुए I क्यूंकि वह बरसों से जिनकी पूजा करते चले आ रहे थे, उन्हें छोड़ना आसान नहीं था I आपने उन्हें बहुत समझाया लेकिन लोग उस खुदा को मानने के लिए तैयार न हुए I इस बात की वजह से लोगो ने आपके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया I यहाँ तक की इस बात से खफा होकर उस वक़्त वहाँ के बादशाह ने आपको आग के दहकते हुए अंगारो में डाल दिया I आग के दहकते अंगारो में डालने के बावजूद आग आपको जला न सकी I क्यूंकि आप को खुदा पर पूरा भरोसा था और खुदा ने आपको जलने से बचा लिया I

आपने हक़ की राह में बड़ी बड़ी कुर्बानियां पेश फ़रमाई हैंI अल्लाह की राह में उसकी रज़ा के लिए आपने अपना वतन तक छोड़ दिया I आपने अपने चहिते बेटे को अल्लाह राह में कुर्बान करने को तैयार हो गए I लेकिन खुदा का करिश्मा ऐसा था की ऐसा होने नहीं दिया I इसी करिश्मे की याद में आज बकरा ईद का त्यौहार मनाया जाता हैं I अल्लाह पाक ने आपको हर इम्तेहान में कामयाबी और दुनिया व आख़िरत की सुखरूई बख्शी I आपको खुदा की और से पैगम्बर का दर्जा दिया गया I

शहद के फायदे और कई बीमारियों का इलाज (Benefits Of Honey)

शहद के फायदे और कई बीमारियों का इलाज 

शहद एक अनमोल नेमत हैं जो खुदा ने इस दुनिया को अता की हैंI शहद की खूबियों का ज़िक्र क़ुरान में भी किया गया हैंI आईये हम बात करते हैं इससे होने वाले कुछ फायदों के बारे में, 

कब्ज़

रात को सोने से पहले 20 ग्राम शहद 200 ग्राम उबले मामूली गर्म दूध में मिलाकर पिएI दूध को उबाले नहीं बल्कि सिर्फ गर्म करे, फिर ठंडा हो जाने पर उसमे शहद मिला कर पिए I इंशाअल्लाह  कब्ज़ दूर हो जायेगा I

पीलिया 

भूरे या लाल रंग के 10 ग्राम शहद में 5  ग्राम आंवले का चूरन मिलायेI दिन में 2 से 3 बार चाटे इंशाअल्लाह पीलिया खत्म हो जायेगा I

चिड़चिड़ापन 

आंवले के मुरब्बे की चाशनी और और एक आंवले को धोकर मसल कर शहद में मिला दे और एक एक घंटे बाद खूब चबा चबा कर चूस चूस कर खाते रहे, जिससे दिमाग की गर्मी दूर हो जाएगी और चिड़चिड़ापन दूर हो जायेगा I

चमड़ी की बीमारी 

गन्ने के सिरके में शहद मिलाकर इस्तेमाल करने से चमड़ी के मर्ज़ से छुटकारा मिलता हैंI डेढ़ चम्मच शहद में आधा चम्मच सिरका मिलाकर दिन में 3 बार इस्तेमाल करे इससे चमड़ी की बीमारी दूर हो जाएगी I

नींद न आना 

5 ग्राम शहद में नीम्बु का रस एक चम्मच मिलाकर इस्तेमाल करे रात को सोते वक़्त दूध में शहद मिलाकर पिए, इससे आप को अच्छी नींद आएगी I

दिल की कमज़ोरी

गाजर को कद्दुकश में रगड़कर सूखा ले फिर 10 ग्राम सूखी गाजर को 15 से 20 ग्राम लेकर शहद में मिलाकर खाये जिससे दिल और फेफड़ो को ताकत मिलेगी और कमज़ोरी दूर हो जाएगी I

भूक न लगना

100 ग्राम गुनगुने पानी में 5 ग्राम शहद घोलकर दिन में 3 बार इस्तेमाल करे इससे हाज़मा दुरस्त हो जायेगा और अच्छी भूक लगने लगेगी I

मुँह के छाले

10 ग्राम त्रिफला चूरन को 100 ग्राम पानी में उबाल ले I दो उबाल आने के बाद उसे ठंडा कर दे फिर उसमे 5 ग्राम शहद मिलाकर 5 मिनट तक कुल्ली करे और गरारे करे इंशाअल्लाह सरे छाले ख़त्म हो जायेंगे I

दमा 

दमा के मरीज़ को शहद बहुत फ़ायदा पहुँचाता हैं I एक चम्मच शहद में एक चम्मच प्याज़ का रस घोल कर देते रहे जिससे गला-फेफड़ा साफ हो जायेगा और इंशाअल्लाह बहुत जल्द आराम मिलेगा I 

Bakra Eid Ki Qurbani and Qurbani Ka Tarika and Dua (क़ुर्बानी और उसका तरीका और दुआ )

Bakra Eid Ki Qurbani and Qurbani Ka Tarika and Dua

कुर्बानी अल्लाह के दो महबूब बन्दों हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम और हज़रत इस्माइल अलैहिस्सलाम की सुन्नत व यादगार हैं। जिसे बरक़रार रखने के लिए अल्लाह पाक ने अपने प्यारे रसूल की उम्मत पर कुर्बानी वाजिब फ़रमाई हैं। जिस पर फ़ितरा वाजिब हैं। उस पर कुर्बानी भी वाजिब हैं। बल्कि कुर्बानी तो उन लोगो पर भी वाजिब हो जाएगी, जिनके पास क़ुर्बानी के दिनों में निसाब जितना माल मौजूद हो। हर हैसियतदार आदमी को कुर्बानी करना ज़रूरी हैं। जो हैसियत रखते हुए भी कुर्बानी न करे उसके लिए अल्लाह के रसूल ने अपनी नाराज़गी ज़ाहिर फरमाते हुए फ़रमाया ! ऐसा आदमी हमारी ईदगाह के करीब न आये।

कुर्बानी 3 दिन होती हैं बकरा ईद की 10,11 और 12 तारीख को लेकिन 10 वी तारीख को क़ुर्बानी करना अफ़ज़ल हैं। रात में क़ुर्बानी करना मकरूह हैं। जहाँ ईद की नमाज़ होती हैं, वहां नमाज़ से पहले क़ुर्बानी सही नहीं।

क़ुर्बानी के वक़्त मौजूद रहे, अपने बच्चो को भी हाज़िर करे और अच्छा जानवर कुर्बान करे क्यूंकि कल क़यामत में पुल सिरात पार करते वक़्त यही जानवर सवारी का काम करेंगे । उन पर सवार होकर लोग जहन्नम पार करके जन्नत में पहुंचेंगे। हदीस शरीफ में हैं की जानवर के हर हर बाल के बदले 10 -10 नेकियां आमालनामे में लिखी जाती हैं। 10 गुनाह मिटाये जाते हैं और दस दर्जे बुलंद किये जाते हैं।

क़ुर्बानी का तरीका 


बेहतर तरीका ये हैं की अपने हाथ से क़ुर्बानी करे, न कर सके तो दूसरे से भी करा सकते हैं। लेकिन मौजूद रहे ज़िबह करने से पहले यह दुआ पढ़े इन्नी वज्जहतो वजहिया लिल्लज़ी फतरस समावाते वल अरदा हनीफा व मा अना मिनल मुशरेकीन।  इन्ना स्वलाती व नुसुकि व महयाया व ममाती लिल्लाहे रब्बिल आलमीन ला शरीका लहू व बिज़ालेका उमिरतो व अना मिनल मुस्लेमीन इतना पढ़कर अल्लाहुम्मा लका व मिनका बिस्मिल्लाहे अल्लाहो अकबर पढ़ते हुए जानवर ज़िबह कर दे। जानवर को पकड़ने वाले लोगो को चाहिए की वह भी तकबीर पढ़े। ज़िबह करने के बाद यह दुआ पढ़े अल्लाहुम्मा तकब्बल मिन्नी कमा तकब्बलता मिन ख़लीलेका इब्राहीमा व हबिबेका मोहम्मदिन सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम अगर किसी दूसरे की तरफ से जानवर ज़िबह कर रहे हैं तो यह दुआ मांगे अल्लाहुम्मा तकब्बल मिन (क़ुरबानी कराने वाले और उसके वालिद का नाम) कमा ताकब्बल्ला। 

जानवर को भूका प्यासा ज़िबह न करे बल्कि खिला पीला कर तैयार रखे। ज़िबह करने के बाद जब तक ठंडा न हो जाये खाल न उतारे। दुआ पढ़ने वाला न मिले तो ऐसी मज़बूरी में बिस्मिल्लाहे अल्लाहु अकबर पढ़कर जानवर ज़िबह कर दिया जाये, तो भी क़ुरबानी हो जाएगी। कभी कभी ऐसा होता हैं की दुआ पढ़ने वाला कोई और होता हैं और जानवर ज़िबह करने वाला कोई और ऐसी हालत में ज़िबह करने वाले को भी बिस्मिल्लाहे अल्लाहु अकबर पढ़ना वाजिब हैं। वरना क़ुर्बानी नहीं होगी।

इस्लाम में बहन बेटी की हदीस (Behen Beti Ki Hadees in Islam)

इस्लाम में बहन बेटी की हदीस (Behen Beti Ki Hadees in Islam)

बेटियां हमारे लिए अल्लाह की नेअमत व रहमत हैं। लेकिन अफ़सोस आज दुनिया ने अपने गलत ख़यालो और रस्मो की वजह से उन्हें अपने लिए मुसीबत समझ लिया हैं। इस्लाम ही दुनिया का वाजिब मज़हब हैं। जिसने माँ बहनो और बेटियों की इज़्ज़त अफ़ज़ाई की और उनकी परवरिश तालीम व तर्बियत और खिदमत पर दुनियां व आख़िरत की बशारते सुनाई। लेकिन आज की नयी पीढ़ी में आज उन्हे पैदा होने से पहले ही मारकर उन्हें जीने के हक़ से महरूम किया जा रहा हैं। जिस की खबरे हम आये दिन सुनते रहते हैं। आइये इस माहौल में हम पैगंबरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के पैग़ामे रहमत सुने और अपनी इस्लाह की कोशिश करे।

हज़रत बीबी आईशा रदियल्लाहो अन्हो का बयान हैं एक दिन एक औरत अपनी दो बच्चियों को लेकर मेरे पास आयी। मैंने उसे तीन खजूरे दी उसने एक एक खजूर अपनी बच्चियों को दे दी और शायद एक अपने पास रख ली। दोनों बच्चियों वह खजूरे खा ली तो उस औरत ने अपनी खजूर दोनों बच्चियों को दे दी। उनकी यह बात जब मैंने प्यारे रसूल को बताई तो आपने फ़रमाया, अल्लाह ने उन दोनों बच्चियों की वजह से उस औरत पर जन्नत वाजिब आकर दी या उसे जहन्नम  से आज़ाद कर दिया।

देखा आपने बेटी की मोहब्बत की बदौलत माँ जन्नती बन गयी। इस्लाम ने किस कद्र बच्चियों और औरतो का मर्तबा बढ़ाया। अल्लाह के प्यारे रसूल ने फ़रमाया जिसके दो बेटियां हो। जब तक उसके पास रहे वह उनके साथ अच्छा बर्ताव करे, उनकी अच्छी तालीम व तर्बियत करे उनका अच्छी जगह निकाह कराये। तो वह बच्चियां उसे जन्नत में ले जाएगी। तिर्मिज़ी शरीफ की हदीस हैं अल्लाह के प्यारे रसूल ने फ़रमाया, जिसके दो बच्चियां या बहने हो जब तक वह उसके पास रहे वह उनकी अच्छी तरह परवरिश करे तो ऐसा आदमी जन्नत में दाखिल होगा।

एक और हदीस में अल्लाह के प्यारे रसूल ने फ़रमाया, जिसने अपनी तीन बेटियों की परवरिश अच्छी तरह की, वह जन्नत में मेरे इतने करीब रहेगा जैसे हाथ की यह दोनों अंगुलियां। ऐसे आदमी को दिन में रोज़ा रखने वाले और रात में नमाज़े पढ़ने वाले मुजाहिद जैसा सवाब मिलेगा।

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रदियल्लाहो अन्हो का बयान हैं। अल्लाह के प्यारे रसूल को मैंने यह फरमाते हुए सुना की जिसके एक बच्ची हो वह उसे ज़िंदा दफन न करे बल्कि उसकी अच्छी परवरिश करे। उसे बेटो से कम न समझे। अल्लाह पाक ऐसे बाप को जन्नत में दाखिल फरमाएगा।

आइये एक हदीस और पढ़ते चले। हज़रत अबू हुरैरा रदियल्लाहो अन्हो का बयान हैं, हमारे आका ने फ़रमाया जिसके तीन बच्चियां हो और गरीब होने की वजह से उनकी तर्बियत व परवरिश में उसे परेशानियां उठानी पड़े और यह उन सारी तकलीफो को बर्दाश्त करते हुए सब्र से काम ले। अल्लाह पाक बच्चियों के साथ प्यार भरा बर्ताव करने की वजह से उसे जन्नत में दाखिल फरमा देगा।

आज दुनिया जिसे अपने लिए बोझ समझ रही हैं जिसे पैदा होने से पहले ही मार दिया जाता हैं। जिसे बेटो से कम समझा जा रहा हैं। जिसे उसके हक़ से महरूम किया जा रहा हैं। उसी बहन बेटी की तालीम व तर्बियत और परवरिश करने वालो को जन्नत की बशारत सुनाई जा रही हैं। ऐसा हुक्म व ताकीद दुनिया के किसी और मज़हब ने नहीं दी हैं। और खुद पैगंबरे इस्लाम ने अपनी बेटियों से बेमिसाल प्यार फरमा कर दुनियां वालो को बेटियों से प्यार करने की तालीम दी हैं।
खुदा के लिए बहन बेटियों को बोझ न समझे बल्कि उन्हें अपने लिए अल्लाह की रहमत माने।

सच्चा दोस्त कौन हैं? (Who is True Friend)

सच्चा दोस्त कौन हैं? (Who is True Friend)

दोस्ती एक बहुत बड़ी निस्बत (रिश्ता) हैं। दोस्ती निभाने के लिए बहुत बड़ी क़ुरबानी भी देनी पड़ती हैं। लेकिन आज दोस्ती का मतलब बिलकुल बदल गया हैं। लोग अपनी ज़रूरत और काम के हिसाब से दोस्ती करते हैं, और मतलब निकल जाने के बाद अलग और दूर हो जाते हैं।

बुज़ुर्गो ने फ़रमाया, ऐसे आदमी से दोस्ती मत करो जो तुम्हारी कमज़ोरियाँ ऐब न बताये और तुम्हारी कमज़ोरियों को तुम्हारी खूबियां बताये। बल्कि दोस्त ऐसे बनाओ जो तुम्हे तुम्हारी कमज़ोरियों से ख़बरदार करता रहे ताकि तुम सुधर जाओ और गुनाहो से बच सको। लेकिन आज हाल यह हैं की अगर कोई इंसान उसके दोस्त की गलती या उसके अंदर की कोई बुराई बताये तो पल में लोग उससे मुँह मोड़ लिया करते हैं। और उसे अपना दुश्मन समझने लगते हैं। यही बात इंसान के ईमान को कमज़ोर करने लगती हैं। अगर आपमें कोई बुरी आदत हैं और आपका दोस्त आपको उससे बचाना चाहता हैं तो वह आपके भले के लिए बोल रहा हैं, न की आपको तकलीफ पहुंचा रहा हैं।

आजकल देखा जाता हैं, की अगर कोई इंसान कोई अच्छा बिज़नेस या नौकरी में लग जाता हैं तो उसके दोस्त उससे जलन रखना शुरू कर देते हैं। अगर वो कामयाब हो जाये तो जलते हैं और नाकामयाब हो जाये तो उस पर हँसते हैं। दूसरा अगर कोई शख्स उसके दोस्त से मदद चाहता हैं या उसकी राय चाहता हैं, किसी अच्छी नौकरी के लिए और उसका दोस्त उसके लिए अच्छी नौकरी होते हुए भी कोई बहाना कर रहा हैं या कहे वह उसकी कामयाबी को देखना नहीं चाहता। ऐसा शख्स भी कभी दोस्त नहीं हो सकता। ऐसे लोगो से हमेशा दूर रहे।

लड़कियों में भी यही देखा जाता हैं अगर किसी लड़की की शादी अच्छे घर में हो जाये या उसे अच्छा शोहर मिल जाये तो उसकी सहेलियां उससे दिल ही दिल में नफरत करना शुरू कर देती हैं, की इसको इतना सब कैसे मिल गया। बहुत से दोस्त एक दूसरे के चेहरे और उनके रहन सहन का मज़ाक बनाते हैं। वो ये सोचते हैं की हम इनसे काफी बेहतर हैं। लोग हमें ही देखेंगे। एक तरह से वो आपकी दोस्ती का मज़ाक बना रहे हैं। असल में एक सच्चा दोस्त वह हैं जो अपनी अच्छाई को छुपाकर अपने दोस्त को हमेशा आगे रखें और उसके साथ कदम कदम पर चले। मुश्किल वक़्त में उसका साथ दे।

आजकल किसी का मुश्किल वक़्त आते ही कुछ लोग अपने दोस्तों से छुपते छुपाते नज़र आते हैं। अगर उन्हें याद करो तो बहाना बनाते हैं की फलां मेरे ये काम हैं वो काम हैं। अगर कोई शख्स 50 लोगो से आपके लिए लड़ जाये समझो उसके दिल में आपके लिए बहुत इज़्ज़त हैं। लेकिन अफ़सोस ऐसे लोग बहुत कम देखने को मिलते हैं।

बहरहाल अच्छा और सच्चा दोस्त वही हैं जो हर हाल में अपने दोस्त का भला चाहे उसकी कामयाबी को अपनी कामयाबी समझे, उसका नुकसान अपना नुकसान समझे,उसके मुश्किल वक़्त को अपना मुश्किल वक़्त समझे यही आपकी ज़िम्मेदारी हैं और यही इस्लाम कहता हैं। अल्लाह पाक हमे इस्लाम के उसूलो पर चलने की तौफीक अता फरमाए आमीन।

सदक़ा करने के फायदे (Benefits Of Sadqa)

किताबों में आया हैं की एक बार हज़रत बीबी फ़ातिमा बीमार हो गयी I हज़रत अली शेरे खुदा आपके पास आये तो आपने उनसे पूछा- आपको किसी चीज़ के खाने...

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