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ईशा की नमाज़ को पढ़ने का तरीका (Isha ki Namaz Ko Padhne ka Tarika)

ईशा की नमाज़ को पढ़ने का तरीका (Isha ki Namaz Ko Padhne ka Tarika)

आज के ब्लॉग में हम ईशा की नमाज़ पर बात करेंगे पिछले कुछ ब्लोग्स में हमने बताया था की फज्र, ज़ोहर, असर और मगरिब की नमाज़ क्या होती हैं? और उन सारी नमाज़ो को पढ़ने के तरीका भी बताया था। आप ने अगर वह ब्लॉग नहीं पढ़े है तो आप All पोस्ट में जाकर वह ब्लॉग पढ़ सकते हैं। आज के ब्लॉग में हम पुरे दिन की आखरी नमाज़ जिसे ईशा की नमाज़ कहा जाता हैं उस पर चर्चा करेंगे। यह नमाज़ दिन की पांचो नमाज़ों में से सबसे लम्बी नमाज़ होती हैं। चलिए आप को बताते है की ईशा की नमाज़ का वक़्त कौनसा होता हैं? इस नमाज़ में कितनी रकातें होती हैं और इस नमाज़ को पढ़ने का तरीका क्या हैं?

ईशा की नमाज़ का वक़्त 

ईशा की नमाज़ का वक़्त रात को करीब 8 बजे से 9 बजे तक रहता हैं गर्मी में यही वक़्त रहता हैं और सर्दी में ये वक़्त थोड़ा जल्दी रहता हैं। इस वक़्त के बीच में मस्जिद में अज़ान हो जाती हैं और मस्जिद में नमाज़ अदा करने के लिए 15 मिनट का वक़्त मिलता हैं। मतलब अज़ान के 15 मिनट के अंदर आप मस्जिद पहुँच जाये और नमाज़ अदा कर लें नहीं तो आपकी नमाज़ छूट जाएगी। फिर आपको घर पर नमाज़ अदा करनी होगी। अगर आप घर पर ईशा की नमाज़ अदा कर रहे हैं तो इस नमाज़ का वक़्त वही करीब 8 बजे से तहज्जुद की नमाज़ से पहले तक रहता है। मतलब रात को करीब 11 बजे से पहले तक यानि आप रात 8 बजे से 11 बजे तक घर पर ईशा की नमाज़ अदा कर सकते हैं।

ईशा की नमाज़ में कितनी रकातें होती हैं?

ईशा की नमाज़ में कुल 17 रकातें होती हैं जो इस तरह है, 

  • 4 रकात सुन्नत
  • 4 रकात फ़र्ज़ 
  • 2 रकात सुन्नत
  • 2 रकात नफ़्ल 
  • 3 रकात वित्र वाजिब
  • 2 रकात नफ़्ल

ईशा की नमाज़ को पढ़ने का तरीका 

सबसे पहले 4 रकात नमाज़ सुन्नत अदा करे नमाज़ से पहले नियत करे जो इस तरह हैं,

नियत की मैंने 4 रकात नमाज़ सुन्नत, वास्ते अल्लाह तआला के, वक़्त ईशा का, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ और फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए अपने दोनों हाथ उठा कर अपने कानों तक ले जाये फिर दोनों हाथों को नाफ़ के नीचे बांध ले। 

नियत के बाद ये पढ़े 

नियत के बाद सूरह सना पढ़ना हैं जो हैं "सुबहानका अल्लाहुम्मा व बिहम्दीका व तबा रकस्मुका व तआला जद्दुका वाला इलाहा गैरुका" इसके बाद आप अउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम बिस्मिल्लाहीर्रहमानिररहीम पढ़े। उसके बाद सूरह फातेहा पढ़े। सूरह फातेहा पढ़ने के बाद कोई एक सूरह पढ़े जैसे कुल्हुवल्लाह, या कुल अऊजु बिरब्बिल फलक या कोई और सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। सूरह पढ़ने के बाद आप अल्लाहो अकबर कहते हुए रुकू में जाये रुकू में जाने के बाद 3 मर्तबा "सुबहान रब्बी अल अज़ीम" पढ़े। 

इस वक़्त आपको अपनी नज़र अपने पैर के अंगूठे पर रखनी हैं। इसके बाद आप "समीअल्लाहु लिमन हमीदह" कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर बोलते हुए सजदे में जाये। सजदे में इस तरह जाये की आपका सीधा घुटना पहले ज़मीन पर लगे। फिर सजदे में 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। 3 बार सुबहाना रब्बी अल आला पढ़ने के बाद फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए उठे और वापिस सजदे में जाये। वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। 

आप फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए खड़े हो जाये और हाथ बांध ले और फिर से सूरह फातेहा (अल्हम्दु शरीफ) पढ़े और उसकी बाद कोई दूसरी सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। उसके बाद फिर से अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकू में जाये। रुकू में जाने के बाद वापिस 3 मर्तबा "सुबहाना रब्बी अल अज़ीम" पढ़े। इसके बाद वापिस आप "समीअल्लाहु लिमन हमीदह" कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और दोबारा रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर कहते हुए सजदे में जाये। सजदे में वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े फिर वापिस अल्लाहु अकबर कहते हुए दोबारा सजदे में सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए सीधे पैर के पंजो के बल पर बैठ जाये। 

ध्यान रहे आप जब बैठे तो सीधे पैर के अंघूठे के बल पर पांचो अँगुलियों समेत बैठे। उल्टा पैर आप ज़मीन पर टिका सकते हैं। अगर कोई परेशानी आ रही हैं इस तरह बैठने में या अंगूठा हिल जाता है तो कोई मसला नहीं लेकिन जानबूझकर अंगूठा हिलाना या दोनों पैर ज़मीन पर टिका कर बैठना गलत हैं। 

फिर आप अत्तहिय्यात पढ़े अत्तहिय्यात पढ़ने के दौरान आपको अशहदु अल्लाह अल्फ़ाज़ आते ही शहादत की ऊँगली को उठाना हैं। फिर आप अल्लाहो अकबर बोलते हुए तीसरी रकात के लिए फिर से खड़े हो जाये। जैसे आपने ये 2 रकात पढ़ी उसी तरह आपको 4 सुन्नत की आखरी 2 और रकात पढ़नी हैं। बस आखिर की 2 रकात में अत्तहिय्यात के बाद दरूदे इब्राहिम एक बाद और दुआ ए मसुरा एक एक बार पढ़ना हैं। उसके बाद सलाम फेरना हैं। इस तरह आपकी 4 रकात नमाज़ सुन्नत हो जाएगी। 

4 रकात फ़र्ज़ नमाज़ का तरीका 

जैसे आपने सुन्नत नमाज़ पढ़ी। बस वैसे ही आपको फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ना हैं क्यूंकि दोनों में 4 रकात ही हैं। बस 4 फ़र्ज़ नमाज़ में थोड़े से बदलाव हैं जो इस तरह हैं पहला की इसमें आपको नियत में 4 सुन्नत की जगह 4 फ़र्ज़ बोलना हैं। दूसरा अगर आप मस्जिद में यह नमाज़ पढ़ रहे हैं तो नियत में पीछे इस इमाम के बोल सकते हैं क्यूंकि मस्जिद में फ़र्ज़ नमाज़ इमाम के पीछे होती हैं। इमाम ही फ़र्ज़ नमाज़ को पढ़वाते हैं। तीसरा जब आप पहली 2 रकात फ़र्ज़ पढ़कर तीसरी रकात के लिए खड़े होंगे, उसमे आपको सूरह फातेहा पढ़ने के बाद सीधे रकू में चले जाना हैं। सूरह फातेहा के बाद कोई सूरह जैसे कुल्हुवल्लाह, या कुल अऊजु बिरब्बिल फलक नहीं पढ़ना हैं। आपको सीधे रकू में जाना हैं और जो बाकि का तरीका हैं वहीं इस नमाज़ में भी करना हैं।  बस ऐसे आपकी 4 फ़र्ज़ नमाज़ भी हो जाएगी। 

2 रकात नमाज़ सुन्नत का तरीका 

जैसे आपने सबसे पहले 4 रकात नमाज़ सुन्नत पढ़ी उसी तरह अब 2 रकात नमाज़ सुन्नत पढ़नी हैं बस इसमें ये फर्क हैं की पहले आपने 4 सुन्नत पढ़ी अब सिर्फ 2 सुन्नत पढ़नी हैं। इसके लिए आपको नियत में 2 रकात नमाज़ सुन्नत बोलना हैं और 4 की जगह 2 रकात ही पढ़नी हैं यानि दूसरी रकात में अत्तहिय्यात, दरूदे इब्राहिम और दुआ ए मसुरा पढ़ कर सलाम फेरना हैं।

2  रकात नमाज़ नफ़्ल का तरीका 

जैसे आपने 2 रकात नमाज़ सुन्नत पढ़ी बस ऐसे ही 2 रकात नमाज़ नफ़्ल पढ़नी हैं। बस नियत में आपको 2 रकात नमाज़ नफ़्ल बोलना हैं। इस तरह आपकी नफ़्ल नमाज़ भी हो जाएगी।

3 रकात वित्र वाजिब नमाज़ पढ़ने का तरीका

वित्र की नमाज़ में 3 रकात होती हैं इस नमाज़ को पढ़ने का तरीका भी आसान हैं जैसे आपने 2 रकात सुन्नत नमाज़ पढ़ी वैसे ही आपको इस नमाज़ की 2 रकात सुन्नत की तरह ही पढ़नी हैं बस आखरी रकात का तरीका थोड़ा अलग हैं जिसे हम थोड़ा तफ्सील से समझते है।

वित्र की नमाज़ की नियत

नियत की मैंने 3 रकात नमाज़ वित्र वाजिब की वास्ते अल्लाह तआला के वक़्त ईशा का, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ और फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए अपने दोनों हाथ उठा कर अपने कानों तक ले जाये फिर दोनों हाथों को नाफ़ के नीचे बांध ले। 

उसके बाद सना पढ़े जो इस तरह हैं "सुबहानका अल्लाहुम्मा व बिहम्दीका व तबा रकस्मुका व तआला जद्दुका वाला इलाहा गैरुका" इसके बाद आप अउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम बिस्मिल्लाहीर्रहमानिररहीम पढ़े। 

उसके बाद सूरह फातेहा पढ़े। सूरह फातेहा पढ़ने के बाद कोई एक सूरह पढ़े जैसे कुल्हुवल्लाह, या कुल अऊजु बिरब्बिल फलक या कोई और सूरह जो आपको याद हो। सूरह पढ़ने के बाद आप अल्लाहो अकबर कहते हुए रुकू में जाये रुकू में जाने के बाद 3 मर्तबा "सुबहान रब्बी अल अज़ीम" पढ़े। इस वक़्त आपको अपनी नज़र अपने पैर के अंगूठे पर रखनी हैं। इसके बाद आप "समीअल्लाहु लिमन हमीदह" कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर बोलते हुए सजदे में जाये। सजदे में इस तरह जाये की आपका सीधा घुटना पहले ज़मीन पर लगे। फिर सजदे में 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। 3 बार सुबहाना रब्बी अल आला पढ़ने के बाद फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए उठे। 

दूसरी रकात भी इस तरह पढ़े इसमें आपको सजदे में जाने के बाद 3-3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़ने के बाद बैठ जाना हैं और अत्तहिय्यात पढ़ना हैं अत्तहिय्यात पढ़ने के दौरान आपको अशहदु अल्लाह अल्फ़ाज़ आते ही शहादत की ऊँगली को उठाना हैं। फिर आप अल्लाहो अकबर बोलते हुए तीसरी रकात के लिए फिर से खड़े हो जाये।

तीसरी रकात में बिस्मिल्लाहीर्रहमानिररहीम पढ़ कर आपको सूरह फातेहा के बाद कोई भी सूरह पढ़ना है। उसके बाद रुकू में न जाकर आपको अल्लाहो अकबर कहते हुए हाथ उठा कर वापिस हाथ बांधना हैं।  फिर दुआ ए क़ुनूत पढ़ना है । उसके बाद वही रुकू में जाकर बाकि की नमाज़ की प्रक्रिया पूरी करे जैसा हमने पहले की 2 रकात में बताया हैं इस तरह आपको वित्र की नमाज़ भी हो जाएगी। 

आखिर में आपको 2 रकात नमाज़ नफ़्ल और पढ़नी हैं जैसा हमने ऊपर नफ़्ल नमाज़ को पढ़ने का तरीका बताया हैं बस वैसे ही ये 2 रकात नफ़्ल नमाज़ पढ़ कर ईशा की नमाज़ पूरी करे। इस तरह आपकी ईशा की नमाज़ हो जाएगी।

उम्मीद करते हैं आपको आज ईशा की नमाज़ को पढ़ने का तरीका मालूम चल गया होगा। अल्लाह हम सबको पंजवक्ता नमाज़ पढ़ने की तौफीक अता फरमाए। 

सूरह रहमान पढ़ने के फायदे (Benefits of Reading Surah Rahman)

सूरह रहमान क़ुरान मजीद की 55 वी सूरह हैं। यह सूरह क़ुरान के 27 वे पारे में मौजूद हैं। इस सूरह में 78 आयतें हैं। इस सूरह का पता मक्का में ...

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