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फ़ज़्र की नमाज़ का वक़्त और पढ़ने का तरीका

फ़ज़्र की नमाज़ का वक़्त और पढ़ने का तरीका


आज के ब्लॉग में हम बात करेंगे फ़ज़्र की नमाज़ के बारे में। मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों और बहनों आजकल की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में हम इतना मशगूल हो गए हैं की अल्लाह की इबादत के लिए वक़्त नहीं निकाल पाते। जिस वजह से हम अपनी औलादों को भी नमाज़ के बारे में बता नहीं पाते। आज का ब्लॉग फ़ज़्र की नमाज़ के ऊपर हैं की फ़ज़्र की नमाज़ क्या होती हैं? इसमें कितनी रकात होती हैं? और हम इस नमाज़ को किस तरह अदा कर सकते हैं? चलिए ब्लॉग को शुरू करते हैं।

फ़ज़्र की नमाज़ क्या होती हैं?

जैसा की हम सभी जानते हैं की इस्लाम में 5 वक़्त की नमाज़े मुसलमानों पर फ़र्ज़ हैं उनमें से जो सबसे पहली नमाज़ हैं उसे फ़ज़्र की नमाज़ कहा जाता हैं। यह नमाज़ बहुत अफ़ज़ल नमाज़ है अगर आप इस नमाज़ को अदा करते है तो आपका पूरा दिन अच्छे से निकलता हैं और आप पुरे दिन काफी सारी बालाओं से महफूज़ रहते है।

फ़ज़्र की नमाज़ का वक़्त 

इस नमाज़ का वक़्त सूरज की पहली किरण के निकलने से कुछ देर पहले रहता हैं यानि की अगर आपके यहाँ 6 बजे सूरज की पहली रौशनी निकाल जाती हैं तो आप फ़ज़्र की नमाज़ उससे पहले पढ़ ले सूरज की रौशनी निकलते है इस नमाज़ का वक़्त ख़त्म हो जाता है। आमतौर पर हमारे इलाको में देखा जाता हैं की अभी गर्मियों के मौसम में फ़ज़्र की नमाज़ के लिए अज़ान 4 बजकर 30 मिनट पर हो जाती हैं और 5 बजे से पहले नमाज़ पढ़ ली जाती है क्यूंकि सुबह करीब 6 बजे तक सूरज की रौशनी निकाल जाती हैं और इस नमाज़ का वक़्त ख़त्म हो जाता है।

लिहाज़ा आप कोशिश करिये की जब अज़ान हो तो जल्दी से वज़ू करके नमाज़ अदा कर ले नहीं तो आपकी नमाज़ छूट जाएगी और आपको फिर कज़ा पढ़ने पड़ेगी। सर्दियों के मौसम में फिर इस नमाज़ का वक़्त बदल जाता हैं। फिर भी आप को फ़ज़्र की नमाज़ का वक़्त जानना हो तो आप आस पास की मस्जिद में जाकर इस नमाज़ के वक़्त का पता लगा सकते है क्यूंकि कई इलाकों में हम अज़ान की आवाज़ से नमाज़ के लिए उठ जाते है लेकिन अगर आस पास मस्जिद नहीं हैं तो हम अज़ान नहीं सुन पाते और नमाज़ पढ़ने के लिए उठ नहीं पाते। बेहतर है अगर आपके आस पास मस्जिद नहीं है तो आप वक़्त पता करके मोबाइल में अलॉर्म रख दे और सही वक़्त पर नमाज़ के लिए उठ जाये। 

फ़ज़्र की नमाज़ में कितनी रकात होती है?

फ़ज़्र की नमाज़ में 4 रकात होती हैं। पहली 2 रकात सुन्नत होती है और आखरी 2 रकात फ़र्ज़ होती है इन दोनों रकात को पढ़ने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगता हैं लिहाज़ा आप इस नमाज़ को पढ़ने में सुस्ती न करे।

फ़ज़्र की नमाज़ पढ़ने का तरीका 

सबसे पहले वज़ू करले अगर आप सोहबत या हमबिस्तरी की हालत में नापाक हो गए हैं तो आप पहले ग़ुस्ल कर ले ग़ुस्ल का तरीका जानने के लिए क्लिक करे। ग़ुस्ल या वज़ू करके किसी पाक जगह चादर या जानमाज़ बिछा कर काबा की तरफ मुँह करके खड़े हो जाये और नियत करे 2 रकात नमाज़ सुन्नत की जो इस तरह हैं,

2 रकात नमाज़ सुन्नत की नियत 

नियत की मैंने 2 रकात नमाज़ सुन्नत, वास्ते अल्लाह तआला के वक़्त फ़ज़्र का, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ और फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए अपने दोनों हाथ उठा कर अपने कानों तक ले जाये फिर दोनों हाथों को नाफ़ के नीचे बांध ले और सूरह सना पढ़े जो इस तरह हैं "सुबहानका अल्लाहुम्मा व बिहम्दीका व तबा रकस्मुका व तआला जद्दुका वाला इलाहा गैरुका" इसके बाद आप अउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम बिस्मिल्लाहीर्रहमानिररहीम पढ़े। 

उसके बाद सूरह फातेहा पढ़े। सूरह फातेहा पढ़ने के बाद कोई एक सूरह पढ़े जैसे कुल्हुवल्लाह, या कुल अऊजु बिरब्बिल फलक या कोई और जो आपको याद हो। सूरह पढ़ने के बाद आप अल्लाहो अकबर कहते हुए रुकू में जाये रुकू में जाने के बाद 3 मर्तबा "सुबहान रब्बी अल अज़ीम" पढ़े। इस वक़्त आपको अपनी नज़र अपने पैर के अंगूठे पर रखनी हैं। इसके बाद आप "समीअल्लाहु लिमन हमीदह" कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर बोलते हुए सजदे में जाये। सजदे में इस तरह जाये की आपका सीधा घुटना पहले ज़मीन पर लगे। फिर सजदे में 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। 3 बार सुबहाना रब्बी अल आला पढ़ने के बाद फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए उठे और वापिस सजदे में जाये। वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। 

आप फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए खड़े हो जाये और हाथ बांध ले और फिर से अल्हम्दु शरीफ पढ़े और उसकी बाद कोई दूसरी सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। उसके बाद फिर से अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकू में जाये। रुकू में जाने के बाद वापिस 3 मर्तबा "सुबहाना रब्बी अल अज़ीम" पढ़े। इसके बाद वापिस आप "समीअल्लाहु लिमन हमीदह" कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और दोबारा रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर कहते हुए सजदे में जाये। सजदे में वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े फिर वापिस अल्लाहु अकबर कहते हुए दोबारा सजदे में सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए बैठ जाये।

ध्यान रहे आप जब बैठे तो सीधे पैर के अंघूठे के बल पर पांचो अँगुलियों समेत बैठे। उल्टा पैर आप ज़मीन पर टिका सकते हैं। अगर कोई परेशानी आ रही हैं इस तरह बैठने में या अंगूठा हिल जाता है तो कोई मसला नहीं। लेकिन जानबूझकर अंगूठा हिलाना या दोनों पैर ज़मीन पर टिका कर बैठना गलत हैं। 

फिर आप अत्तहिय्यात पढ़े अत्तहिय्यात पढ़ने के दौरान आपको अशहदु अल्लाह अल्फ़ाज़ आते ही शहादत की ऊँगली को उठाना हैं। अत्तहिय्यात पढ़ने के बाद आप दरूदे इब्राहिम एक मर्तबा पढ़े। इसके बाद आप दुआ ए मसुरा पढ़े। ये दुआ पढ़ने के बाद सलाम फेर ले जैसे अस्सलामो अलैकुम वरहमतुल्लाह पहले सीधे हाथ की तरफ फिर उलटे हाथ की तरफ सलाम फेर कर नमाज़ को पूरी करे। इस तरह आपकी 2 रकत नमाज़ सुन्नत हो गयी। 

2 रकत नमाज़ फ़र्ज़ की नियत 

जैसे आपने 2 रकात सुन्नत पढ़ी उसी तरह आपको फ़र्ज़ नमाज़ भी पढ़नी है। बस इसमें नियत में मामूली से बदलाव हैं जो इस तरह हैं, 

नियत की मैंने 2 रकात नमाज़ फ़र्ज़ वास्ते अल्लाह तआला के(अगर आप मस्जिद में नमाज़ पढ़ रहे हैं तो पीछे इस इमाम के बोल सकते है घर पर पढ़ रहे हैं तो ये लाइन बोलने की ज़रूरत नहीं ) वक़्त फ़ज़्र का, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ और फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए अपने दोनों हाथ उठा कर अपने कानों तक ले जाये फिर दोनों हाथों को नाफ़ के नीचे बांध ले। फिर जो जो आयतें और सूरह और तरीका हमने सुन्नत नमाज़ में पढ़ने के लिए बताया हैं वही तरीका अपनाये इस तरह आपकी फ़र्ज़ नमाज़ भी हो जाएगी। 

इंशाल्लाह यह ब्लॉग पढ़ने के बाद आपको फ़ज़्र की नमाज़ को पढ़ने से जुड़ी मुश्किलात नहीं आएगी। अल्लाह हम सबको पंजवक्ता नमाज़ पढ़ने की तौफ़ीक़ अता फरमाए आमीन। 

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