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मोमिन का आख़िरत का सफर (Momin Ka Akhirat Ka Safar)

मोमिन का आख़िरत का सफर (Momin Ka Akhirat Ka Safar)

एक दिन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम एक अन्सारी सहाबी के जनाज़े में कब्रिस्तान तशरीफ़ ले गए। कब्र के पास पहुंचे तो कब्र तैयार नहीं थी इसलिए आप वहाँ बैठ गए। साथ जाने वाले सहाबा भी आप के गिर्द इस तरह खामोश बैठ गए जैसे की उनके सरो पर परिंदे बैठे हो। आप के हाथ में छड़ी थी आप उससे ज़मीन कुरेदने लगे फिर सहाबा से फरमाने लगे ! कब्र के अज़ाब से बचने के लिए अल्लाह से पनाह मांगो

फिर फ़रमाया ! मोमिन का जब आखरी वक़्त करीब आता हैं और आख़िरत का सफर सामने होता हैं तो उसके पास आसमान से फ़रिश्ते नाज़िल होते हैं। जिनके चेहरे सफ़ेद होते हैं जैसे की सूरज चमक रहा हो उनके पास जन्नती कफ़न और जन्नती खुशबु होती हैं। वह फ़रिश्ते मरने वाले के पास बैठ जाते है। मरने वाले की नज़र जहाँ तक जाती हैं वहाँ तक फ़रिश्ते ही फ़रिश्ते नज़र आते हैं। फिर मलकुल मौत अलैहिस्लाम तशरीफ़ लाते हैं और उनके सिरहाने बैठ कर फरमाते हैं ! एक पाक जान अल्लाह की मगफिरत और रिज़वान की तरफ चल। फिर मोमिन की रूह इस तरह बहती हुई बदन से निकलती हैं जैसे मशक से पानी निकलता हैं। मलकुल मौत उस रूह को ले लेते हैं। उनके लेते ही दूसरे फ़रिश्ते फ़ौरन उस रूह को लेकर जन्नती कफ़न व खुशबु में डाल देते हैं। उस रूह से मुश्क की तरफ खुशबु निकलती हैं।

फिर फ़रिश्ते उस रूह को लेकर आसमान की तरफ बढ़ते हैं। उस खुशबूदार महकती रूह को देखकर आसमान के फ़रिश्ते पूछते है किस की रूह हैं? रूह ले जाने वाले फ़रिश्ते जवाब देते हैं, यह फलां इंसान की रूह हैं। इस तरह फ़रिश्ते उसे लेकर सातवें आसमान पर पहुँच जाते हैं उसके बाद अल्लाह का हुक्म आता हैं इस बन्दे के कामों का हिसाब किताब इल्लीइन में लिखो और रूह को वापिस ज़मीन पर ले जाओ क्यूंकि मैंने उसे ज़मीन से पैदा किया हैं वहीं लौटाऊंगा और फिर वहीँ से उठाऊंगा।

चुनांचे उसकी रूह वापिस लाकर उसके बदन में डाल दी जाती हैं। मुन्कर-नकीर उससे 3 सवाल करते हैं वह तीनो सवालो के सही जवाब देता हैं तो अल्लाह का हुक्म होता हैं ऐ फ़रिश्तो ! इसके लिए जन्नती फर्श बिछा दो इसे जन्नती जोड़ा पहना दो और इसके लिए जन्नत का एक दरवाज़ा खोल दो। इस तरह एक मोमिन का आख़िरत का सफर खत्म होता हैं।

अल्लाह तआला हमें इस्लामी ज़िदगी जीने की तौफीक दे और हमें अपने ईमान पर चलने की तौफीक अता फरमाए और ऊपर बयान हदीस के मुताबिक हमारा आखरी सफर आसान करके अंजाम बेहतर कर दे आमीन।

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