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शहद के फायदे और कई बीमारियों का इलाज (Benefits Of Honey)

शहद के फायदे और कई बीमारियों का इलाज 

शहद एक अनमोल नेमत हैं जो खुदा ने इस दुनिया को अता की हैंI शहद की खूबियों का ज़िक्र क़ुरान में भी किया गया हैंI आईये हम बात करते हैं इससे होने वाले कुछ फायदों के बारे में, 

कब्ज़

रात को सोने से पहले 20 ग्राम शहद 200 ग्राम उबले मामूली गर्म दूध में मिलाकर पिएI दूध को उबाले नहीं बल्कि सिर्फ गर्म करे, फिर ठंडा हो जाने पर उसमे शहद मिला कर पिए I इंशाअल्लाह  कब्ज़ दूर हो जायेगा I

पीलिया 

भूरे या लाल रंग के 10 ग्राम शहद में 5  ग्राम आंवले का चूरन मिलायेI दिन में 2 से 3 बार चाटे इंशाअल्लाह पीलिया खत्म हो जायेगा I

चिड़चिड़ापन 

आंवले के मुरब्बे की चाशनी और और एक आंवले को धोकर मसल कर शहद में मिला दे और एक एक घंटे बाद खूब चबा चबा कर चूस चूस कर खाते रहे, जिससे दिमाग की गर्मी दूर हो जाएगी और चिड़चिड़ापन दूर हो जायेगा I

चमड़ी की बीमारी 

गन्ने के सिरके में शहद मिलाकर इस्तेमाल करने से चमड़ी के मर्ज़ से छुटकारा मिलता हैंI डेढ़ चम्मच शहद में आधा चम्मच सिरका मिलाकर दिन में 3 बार इस्तेमाल करे इससे चमड़ी की बीमारी दूर हो जाएगी I

नींद न आना 

5 ग्राम शहद में नीम्बु का रस एक चम्मच मिलाकर इस्तेमाल करे रात को सोते वक़्त दूध में शहद मिलाकर पिए, इससे आप को अच्छी नींद आएगी I

दिल की कमज़ोरी

गाजर को कद्दुकश में रगड़कर सूखा ले फिर 10 ग्राम सूखी गाजर को 15 से 20 ग्राम लेकर शहद में मिलाकर खाये जिससे दिल और फेफड़ो को ताकत मिलेगी और कमज़ोरी दूर हो जाएगी I

भूक न लगना

100 ग्राम गुनगुने पानी में 5 ग्राम शहद घोलकर दिन में 3 बार इस्तेमाल करे इससे हाज़मा दुरस्त हो जायेगा और अच्छी भूक लगने लगेगी I

मुँह के छाले

10 ग्राम त्रिफला चूरन को 100 ग्राम पानी में उबाल ले I दो उबाल आने के बाद उसे ठंडा कर दे फिर उसमे 5 ग्राम शहद मिलाकर 5 मिनट तक कुल्ली करे और गरारे करे इंशाअल्लाह सरे छाले ख़त्म हो जायेंगे I

दमा 

दमा के मरीज़ को शहद बहुत फ़ायदा पहुँचाता हैं I एक चम्मच शहद में एक चम्मच प्याज़ का रस घोल कर देते रहे जिससे गला-फेफड़ा साफ हो जायेगा और इंशाअल्लाह बहुत जल्द आराम मिलेगा I 

बकरा ईद की क़ुर्बानी का तरीका और दुआ (Qurbani Ki Tarika)

Bakra Eid Ki Qurbani and Qurbani Ka Tarika and Dua

कुर्बानी अल्लाह के दो महबूब बन्दों हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम और हज़रत इस्माइल अलैहिस्सलाम की सुन्नत व यादगार हैं। जिसे बरक़रार रखने के लिए अल्लाह पाक ने अपने प्यारे रसूल की उम्मत पर कुर्बानी वाजिब फ़रमाई हैं। जिस पर फ़ितरा वाजिब हैं। उस पर कुर्बानी भी वाजिब हैं। बल्कि कुर्बानी तो उन लोगो पर भी वाजिब हो जाएगी, जिनके पास क़ुर्बानी के दिनों में निसाब जितना माल मौजूद हो। हर हैसियतदार आदमी को कुर्बानी करना ज़रूरी हैं। जो हैसियत रखते हुए भी कुर्बानी न करे उसके लिए अल्लाह के रसूल ने अपनी नाराज़गी ज़ाहिर फरमाते हुए फ़रमाया ! ऐसा आदमी हमारी ईदगाह के करीब न आये।

कुर्बानी 3 दिन होती हैं बकरा ईद की 10,11 और 12 तारीख को लेकिन 10 वी तारीख को क़ुर्बानी करना अफ़ज़ल हैं। रात में क़ुर्बानी करना मकरूह हैं। हदीस में आया हैं की बकरा ईद की नमाज़ से पहले जानकर की क़ुर्बानी करना सही नहीं। आप पहले ईद की नमाज़ अदा कर ले फिर जानवर को क़ुर्बान करे। 

जिसके नाम से क़ुर्बानी हो रही हैं वह क़ुर्बानी के वक़्त मौजूद रहे, अपने बच्चो को भी हाज़िर करे और अच्छा जानवर कुर्बान करे। क्यूंकि कल क़यामत में पुल सिरात पार करते वक़्त यही जानवर सवारी का काम करेंगे । उन पर सवार होकर लोग जहन्नम पार करके जन्नत में पहुंचेंगे। हदीस शरीफ में हैं की जानवर के हर हर बाल के बदले 10 -10 नेकियां आमालनामे में लिखी जाती हैं। 10 गुनाह मिटाये जाते हैं और दस दर्जे बुलंद किये जाते हैं।

क़ुर्बानी का तरीका 


सबसे पहले जानकर को क़ुर्बान करने से पहले उसे खुश खिला पिला दे अच्छे से पानी पिला दें ताकि जानवर का गाला गिला हो जाये और छुरी उसकी गर्दन पर आसानी से चल जाये। क़ुरबानी के वक़्त जानवर का मुँह क़िब्ला की तरफ करके लिटा दे जो जो ज़िबह कर रहा हैं वो भी अपना रुख क़िब्ला की तरफ कर दे याद रहे जिस छुरी से जानवर को ज़िबह कर रहे है उस छुरी की धार तेज़ हो ताकि ज़िबह करते वक़्त जानवर आसानी से ज़िबह हो जाये और उसे ज़्यादा तकलीफ न हो बेहतर तरीका ये हैं की अपने हाथ से क़ुर्बानी करे, न कर सके तो दूसरे से भी करा सकते हैं। लेकिन कोशिश करे की जब जानवर को ज़िबह कर रहे हैं तब आप वहां मौजूद रहे। 

बहुत से लोग अपने नाम से क़ुर्बानी कर देते है लेकिन क़ुर्बानी के वक़्त कमज़ोर दिल की वजह से वो कही गायब हो जाते हैं। कोशिश करे ऐसी मौकों पर अपने दिल को मज़बूत रखे। क़ुर्बानी के वक़्त शोर शराबा न करे और अगर कोई दूसरा जानवर घर पर हैं तो उसके सामने किसी जानवर की क़ुर्बानी न करे। दूसरे जानवर को कही और ले जाकर बांध दे।

क़ुर्बानी की दुआ 


ज़िबह करने से पहले यह दुआ पढ़े "इन्नी वज्जहतो वजहिया लिल्लज़ी फतरस समावाते वल अरदा हनीफा व मा अना मिनल मुशरेकीन।  इन्ना स्वलाती व नुसुकि व महयाया व ममाती लिल्लाहे रब्बिल आलमीन ला शरीका लहू व बिज़ालेका उमिरतो व अना मिनल मुस्लेमीन इतना पढ़कर अल्लाहुम्मा लका व मिनका बिस्मिल्लाहे अल्लाहो अकबर" पढ़ते हुए जानवर ज़िबह कर दे। जानवर को पकड़ने वाले लोगो को चाहिए की वह भी तकबीर पढ़े। 

ज़िबह करने के बाद यह दुआ पढ़े अल्लाहुम्मा तकब्बल मिन्नी कमा तकब्बलता मिन ख़लीलेका इब्राहीमा व हबिबेका मोहम्मदिन सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम अगर किसी दूसरे की तरफ से जानवर ज़िबह कर रहे हैं तो यह दुआ मांगे "अल्लाहुम्मा तकब्बल मिन (क़ुरबानी कराने वाले और उसके वालिद का नाम) कमा ताकब्बल्ला"। 

ज़िबह करने के बाद जब तक ठंडा न हो जाये खाल न उतारे। दुआ पढ़ने वाला न मिले तो ऐसी मज़बूरी में बिस्मिल्लाहे अल्लाहु अकबर पढ़कर जानवर ज़िबह कर दिया जाये, तो भी क़ुरबानी हो जाएगी। कभी कभी ऐसा होता हैं की दुआ पढ़ने वाला कोई और होता हैं और जानवर ज़िबह करने वाला कोई और ऐसी हालत में ज़िबह करने वाले को भी बिस्मिल्लाहे अल्लाहु अकबर पढ़ना वाजिब हैं। वरना क़ुर्बानी नहीं होगी।

क़ुरबानी का गोश्त का क्या करें?


क़ुरबानी का गोश्त के 3 हिस्से कर दे 

  1. एक हिस्सा अपने पास रख ले।
  2. एक जिनके घर में क़ुरबानी नहीं हुई हैं मतलब जो आपके रिश्तेदार है या दोस्त हैं किसी वजह से उनके घर क़ुरबानी नहीं हुई तो एक हिस्सा उनके लिए रख ले। 
  3. एक हिस्सा गरीबो के लिए रख ले। और अलग अलग थैली में हिस्से कर गरीबो में गोश्त बाँट दे।

कुछ ज़रूरी बातें जो क़ुर्बानी के दिन याद रखे और उस पर अमल करें। 


  • एक दूसरे के जानवरों को आपस में न लड़वाएं। 
  • क़ुर्बानी का मज़ाक न बनाये क़ुर्बानी के गोश्त के फोटो सोशल मीडिया पर न डाले।
  • गोश्त के अलग अलग पकवान बना कर दोस्तों रिश्तेदारों में शेयर न करें। 
  • क़ुर्बानी के वक़्त जानवर ज़िबह होते वक़्त वीडियो न बनाये।
  • सिर्फ गोश्त खाने के लिए जानवर क़ुर्बान न करें। क़ुर्बानी के असल मतलब को ध्यान में रखे। 




इस्लाम में बहन बेटी की हदीस (Behen Beti Ki Hadees in Islam)

इस्लाम में बहन बेटी की हदीस (Behen Beti Ki Hadees in Islam)

बेटियां हमारे लिए अल्लाह की नेअमत व रहमत हैं। लेकिन अफ़सोस आज दुनिया ने अपने गलत ख़यालो और रस्मो की वजह से उन्हें अपने लिए मुसीबत समझ लिया हैं। इस्लाम ही दुनिया का वाजिब मज़हब हैं। जिसने माँ बहनो और बेटियों की इज़्ज़त अफ़ज़ाई की और उनकी परवरिश तालीम व तर्बियत और खिदमत पर दुनियां व आख़िरत की बशारते सुनाई। लेकिन आज की नयी पीढ़ी में आज उन्हे पैदा होने से पहले ही मारकर उन्हें जीने के हक़ से महरूम किया जा रहा हैं। जिस की खबरे हम आये दिन सुनते रहते हैं। आइये इस माहौल में हम पैगंबरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के पैग़ामे रहमत सुने और अपनी इस्लाह की कोशिश करे।

हज़रत बीबी आईशा रदियल्लाहो अन्हो का बयान हैं एक दिन एक औरत अपनी दो बच्चियों को लेकर मेरे पास आयी। मैंने उसे तीन खजूरे दी उसने एक एक खजूर अपनी बच्चियों को दे दी और शायद एक अपने पास रख ली। दोनों बच्चियों वह खजूरे खा ली तो उस औरत ने अपनी खजूर दोनों बच्चियों को दे दी। उनकी यह बात जब मैंने प्यारे रसूल को बताई तो आपने फ़रमाया, अल्लाह ने उन दोनों बच्चियों की वजह से उस औरत पर जन्नत वाजिब कर दी या उसे जहन्नम  से आज़ाद कर दिया।

देखा आपने बेटी की मोहब्बत की बदौलत माँ जन्नती बन गयी। इस्लाम ने किस कद्र बच्चियों और औरतो का मर्तबा बढ़ाया। अल्लाह के प्यारे रसूल ने फ़रमाया जिसके दो बेटियां हो। जब तक उसके पास रहे वह उनके साथ अच्छा बर्ताव करे, उनकी अच्छी तालीम व तर्बियत करे उनका अच्छी जगह निकाह कराये। तो वह बच्चियां उसे जन्नत में ले जाएगी। तिर्मिज़ी शरीफ की हदीस हैं अल्लाह के प्यारे रसूल ने फ़रमाया, जिसके दो बच्चियां या बहने हो जब तक वह उसके पास रहे वह उनकी अच्छी तरह परवरिश करे तो ऐसा आदमी जन्नत में दाखिल होगा।

एक और हदीस में अल्लाह के प्यारे रसूल ने फ़रमाया, जिसने अपनी तीन बेटियों की परवरिश अच्छी तरह की, वह जन्नत में मेरे इतने करीब रहेगा जैसे हाथ की यह दोनों अंगुलियां। ऐसे आदमी को दिन में रोज़ा रखने वाले और रात में नमाज़े पढ़ने वाले मुजाहिद जैसा सवाब मिलेगा।

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रदियल्लाहो अन्हो का बयान हैं। अल्लाह के प्यारे रसूल को मैंने यह फरमाते हुए सुना की जिसके एक बच्ची हो वह उसे ज़िंदा दफन न करे बल्कि उसकी अच्छी परवरिश करे। उसे बेटो से कम न समझे। अल्लाह पाक ऐसे बाप को जन्नत में दाखिल फरमाएगा।

आइये एक हदीस और पढ़ते चले। हज़रत अबू हुरैरा रदियल्लाहो अन्हो का बयान हैं, हमारे आका ने फ़रमाया जिसके तीन बच्चियां हो और गरीब होने की वजह से उनकी तर्बियत व परवरिश में उसे परेशानियां उठानी पड़े और यह उन सारी तकलीफो को बर्दाश्त करते हुए सब्र से काम ले। अल्लाह पाक बच्चियों के साथ प्यार भरा बर्ताव करने की वजह से उसे जन्नत में दाखिल फरमा देगा।

आज दुनिया जिसे अपने लिए बोझ समझ रही हैं जिसे पैदा होने से पहले ही मार दिया जाता हैं। जिसे बेटो से कम समझा जा रहा हैं। जिसे उसके हक़ से महरूम किया जा रहा हैं। उसी बहन बेटी की तालीम व तर्बियत और परवरिश करने वालो को जन्नत की बशारत सुनाई जा रही हैं। ऐसा हुक्म व ताकीद दुनिया के किसी और मज़हब ने नहीं दी हैं। और खुद पैगंबरे इस्लाम ने अपनी बेटियों से बेमिसाल प्यार फरमा कर दुनियां वालो को बेटियों से प्यार करने की तालीम दी हैं।
खुदा के लिए बहन बेटियों को बोझ न समझे बल्कि उन्हें अपने लिए अल्लाह की रहमत माने।

सच्चा दोस्त कौन हैं? (Who is True Friend)

सच्चा दोस्त कौन हैं? (Who is True Friend)

दोस्ती एक बहुत बड़ी निस्बत (रिश्ता) हैं। दोस्ती निभाने के लिए बहुत बड़ी क़ुरबानी भी देनी पड़ती हैं। लेकिन आज दोस्ती का मतलब बिलकुल बदल गया हैं। लोग अपनी ज़रूरत और काम के हिसाब से दोस्ती करते हैं, और मतलब निकल जाने के बाद अलग और दूर हो जाते हैं।

बुज़ुर्गो ने फ़रमाया, ऐसे आदमी से दोस्ती मत करो जो तुम्हारी कमज़ोरियाँ ऐब न बताये और तुम्हारी कमज़ोरियों को तुम्हारी खूबियां बताये। बल्कि दोस्त ऐसे बनाओ जो तुम्हे तुम्हारी कमज़ोरियों से ख़बरदार करता रहे ताकि तुम सुधर जाओ और गुनाहो से बच सको। लेकिन आज हाल यह हैं की अगर कोई इंसान उसके दोस्त की गलती या उसके अंदर की कोई बुराई बताये तो पल में लोग उससे मुँह मोड़ लिया करते हैं। और उसे अपना दुश्मन समझने लगते हैं। यही बात इंसान के ईमान को कमज़ोर करने लगती हैं। अगर आपमें कोई बुरी आदत हैं और आपका दोस्त आपको उससे बचाना चाहता हैं तो वह आपके भले के लिए बोल रहा हैं, न की आपको तकलीफ पहुंचा रहा हैं।

आजकल देखा जाता हैं, की अगर कोई इंसान कोई अच्छा बिज़नेस या नौकरी में लग जाता हैं तो उसके दोस्त उससे जलन रखना शुरू कर देते हैं। अगर वो कामयाब हो जाये तो जलते हैं और नाकामयाब हो जाये तो उस पर हँसते हैं। दूसरा अगर कोई शख्स उसके दोस्त से मदद चाहता हैं या उसकी राय चाहता हैं, किसी अच्छी नौकरी के लिए और उसका दोस्त उसके लिए अच्छी नौकरी होते हुए भी कोई बहाना कर रहा हैं या कहे वह उसकी कामयाबी को देखना नहीं चाहता। ऐसा शख्स भी कभी दोस्त नहीं हो सकता। ऐसे लोगो से हमेशा दूर रहे।

लड़कियों में भी यही देखा जाता हैं अगर किसी लड़की की शादी अच्छे घर में हो जाये या उसे अच्छा शोहर मिल जाये तो उसकी सहेलियां उससे दिल ही दिल में नफरत करना शुरू कर देती हैं, की इसको इतना सब कैसे मिल गया। बहुत से दोस्त एक दूसरे के चेहरे और उनके रहन सहन का मज़ाक बनाते हैं। वो ये सोचते हैं की हम इनसे काफी बेहतर हैं। लोग हमें ही देखेंगे। एक तरह से वो आपकी दोस्ती का मज़ाक बना रहे हैं। असल में एक सच्चा दोस्त वह हैं जो अपनी अच्छाई को छुपाकर अपने दोस्त को हमेशा आगे रखें और उसके साथ कदम कदम पर चले। मुश्किल वक़्त में उसका साथ दे।

आजकल किसी का मुश्किल वक़्त आते ही कुछ लोग अपने दोस्तों से छुपते छुपाते नज़र आते हैं। अगर उन्हें याद करो तो बहाना बनाते हैं की फलां मेरे ये काम हैं वो काम हैं। अगर कोई शख्स 50 लोगो से आपके लिए लड़ जाये समझो उसके दिल में आपके लिए बहुत इज़्ज़त हैं। लेकिन अफ़सोस ऐसे लोग बहुत कम देखने को मिलते हैं।

बहरहाल अच्छा और सच्चा दोस्त वही हैं जो हर हाल में अपने दोस्त का भला चाहे उसकी कामयाबी को अपनी कामयाबी समझे, उसका नुकसान अपना नुकसान समझे,उसके मुश्किल वक़्त को अपना मुश्किल वक़्त समझे यही आपकी ज़िम्मेदारी हैं और यही इस्लाम कहता हैं। अल्लाह पाक हमे इस्लाम के उसूलो पर चलने की तौफीक अता फरमाए आमीन।

इस्लाम में ग़ीबत क्या हैं? What is Gheebat in Islam

इस्लाम में ग़ीबत क्या हैं? What is Gheebat in Islam

पीठ पीछे किसी की बुराई बयां करने को ग़ीबत कहा जाता हैं। यह गुनाहे कबीरा हैं। क़ुरान शरीफ में ग़ीबत करने वाले को अपने मुर्दा भाई का गोश्त खाने वाला जैसा कहा गया हैं। यह बीमारी इतनी आम हो चुकी हैं की लोग इस से बिलकुल नहीं डरते न इसके अंजाम की परवाह करते हैं। ग़ीबत की नसुहात से ईमान की हरारत खत्म हो जाती हैं। मरते वक़्त ईमान खतरे में रहता हैं। ग़ीबत करने वाले की दुआ कबूल नहीं होती। ग़ीबत से नमाज़ और दूसरी इबादतों का नूर खत्म हो जाता हैं। ग़ीबत करना तो ज़िना से भी बदतर गुनाह हैं। गीबत करने वाले को जहन्नम में मुर्दार खाना पड़ेगा।

ग़ीबत के बारे में एक दिन अल्लाह के रसूल ने सहाबा से पूछा क्या तुम जानते हो की ग़ीबत क्या हैं? सहाबा ने अर्ज़ किया, या रसूलल्लाह आप ही बेहतर जानते हो। आपने फ़रमाया तुम अपने भाई के बारे में ऐसी बात करो जो उसे पसंद न हो। सहाबा ने अर्ज़ किया या रसूलल्लाह अगर वह बात उसके अंदर हो तो? आपने फ़रमाया इसको ही तो ग़ीबत कहते हैं। अगर वह बुराई उसके अंदर न हो तो उसे इलज़ाम कहा जायेगा।

बहरहाल ग़ीबत बहुत सारी तबहियो की जड़ हैं। इसकी वजह से आज हमारे घर लड़ाई झगड़ो का अखाडा बन गए हैं। आजकल देखा जाता हैं लोगो एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए पीठ पीछे उस शख्स की बुराई करते हैं। हमारे घरो में ही देख लो कोई अपने भाई की बुराई करता हैं तो कोई भाभी की कोई उनके बच्चो की बुराई करता हैं। तो कोई उनके अच्छे रहन सहन की कोई अगर ईमानदारी से ज़्यादा पैसा कमा रहा है तो लोग कहते हैं ये तो हराम का खाता हैं। हर कोई एक दूसरे की बुराई करने में लगा हैं। चाहे वो काम धंधा के मामले में हो या अच्छी नौकरी के मामले में लोग इन हरकतों से बाज़ नहीं आते,क्यूंकि उन्हें अल्लाह का खौफ ही नहीं हैं।

जो लोग ऐसा कर रहे हैं वो मौत के वक़्त बहुत घबराएंगे। उन्हें मौत इतनी आसानी से नसीब नहीं होगी। इस ग़ीबत की वजह से लोग आपस में लड़ रहे हैं। एक दूसरे को मार रहे हैं फिर लोग कहते हैं खुदा हमारी नहीं सुनता। आप जो भी हरकत दिन भर में करते हैं खुदा के पास उन सब हरकतों का हिसाब रहता हैं। आज लोग दूसरे धर्म के लोगो की बुराई करते हैं फलाना इनका धर्म ऐसा हैं वैसा हैं। अगर आप अपने दीन पर ध्यान देंगे तो इंशाल्लाह पूरी कायनात आपके दीन को अपना लेगी।

खुदा के लिए हमे चाहिए की हम अपनी ज़बान पर काबू रखे लोगो की बुराइयाँ करना बंद करे। इस्लाम के उसूलो पर चले ताकि अल्लाह हमें कब्र व जहन्नम के अज़ाब से बचा ले   आमीन।

शबे क़द्र की दुआ नमाज़ और इबादत (Shab-e-Qadr ki Dua Namaz or Ibadat)

शबे क़द्र की दुआ नमाज़ और इबादत  (Shab-e-Qadr ki Dua Namaz or Ibadat)

पिछली पोस्ट में हमने लैलतुल कद्र या शबे क़द्र के बारे में बताया था। आज हम इस रात की इबादतों के बारे में बात करेंगे। इस रात की खास इबादत क़ुरान की तिलावत और नफ्ली नमाज़े व ज़िक्र हैं। इसलिए कुछ वक़्त तिलावत में बिताये कुछ नफ्ली नमाज़े पढ़े। और कुछ देर इस रात की खास दुआ अल्लाहुम्मा इन्नका अफुउन तुहिब्बुल अफ़्व फअफ़ो अन्नी पढ़े।

शबे क़द्र की नफ़्ल नमाज़े 


4 रकात नमाज़ इस तरह पढ़े की हर रकात में एक बार अल्हम्दो शरीफ एक बार इन्ना अन्ज़लना और 27 बार कुल्हुवल्लाह शरीफ पढ़े। इंशाल्लाह अल्लाह करीम आपको गुनाहो से पाक फरमा देगा।

कम से कम 2 रकात ही खुलूस के साथ इस तरह पढ़े की हर रकात में सूरह फातेहा के बाद 1 बार इन्ना अन्ज़लना और 3 बार कुल्हुवल्लाह शरीफ पढ़े। इंशाल्लाह आपको शबे कद्र की बरकत हासिल होगी।

हज़रत अली शेरे खुदा फरमाते हैं, जो आदमी इस रात 7 बार सूरह अल क़द्र इन्ना अन्ज़लना पढ़ेगा। अल्लाह पाक उसे बलाओं और मुसीबतो से बचाता हैं, और 70 हज़ार फ़रिश्ते उसके लिए जन्नत की दुआ करते हैं।

हज़रत बीबी आइशा फरमाती हैं मैने अर्ज़ किया या रसुल्लाह, शबे क़द्र की रात क्या दुआ माँगे। आपने फ़रमाया अल्लाहुम्मा इन्नका अफुउन तुहिब्बुल अफ़्व फअफ़ो अन्नी

2 रकात नमाज़ इस तरफ पढ़े की हर रकात में सूरह फातेहा के बाद 7 बार कुल्हुवल्लाह शरीफ और सलाम फेरने के बाद 70 बार अस्तग़फिरउल्लाह व अतूबो इलैहि पढ़े। अल्लाह पाक उसे और उसके माँ बाप के गुनाहो को बक्श देगा।

4 रकात नमाज़ इस तरफ पढ़े की हर रकात में सूरह फातेहा के बाद 3 बार इन्ना अन्ज़लना और 7 बार कुल्हुवल्लाह शरीफ पढ़े। इंशाल्लाह मौत के वक़्त की बेचैनी से महफूज़ रहेंगे।

4 रकात नमाज़ इस तरह पढ़े की हर रकात में अल्हम्दो शरीफ के बाद एक बार इन्ना अन्ज़लना और 27 बार कुल्हुवल्लाह शरीफ पढ़े। इस नमाज़ की बरकत से गुनाह माफ़ हो जायेंगे और अल्लाह पाक आपको जन्नत में आला मक़ाम अता फरमाएगा।

4 रकात नमाज़ इस तरह पढ़े की हर रकात में अल्हम्दो शरीफ के बाद 3 बार इन्ना अन्ज़लना और 50 बार कुल्हुवल्लाह शरीफ पढ़े और सलाम फेरने के बाद सजदे में सर रखकर एक बार सुब्हानल्लाहे वल्हम्दुलिल्लाहे व लाइलाहा इल्लल्लाहो वल्लाहो अकबर पढ़े। इंशाल्लाह आपको इस मुबारक रात की बेपनाह नेअमते नसीब होगी। इस रात 2 रकात तयीहतुल वुदु और 2 रकात तहियतुल मस्जिद पढ़ना भी बहुत सवाब रखता हैं।

इस रात अगर वक़्त मिले तो कम से कम एक बार सलातुल तस्बीह ज़रूर पढ़ने की कोशिश करे यह इतनी फ़ज़ीलत वाली नमाज़ हैं। अगर यह नमाज़ ज़िन्दगी में अगर एक बार भी पढ़ ली तो इसकी फ़ज़ीलत से इंशाल्लाह बन्दे के गुनाह माफ़ हो जाते हैं। लिहाज़ा कोशिश करे की यह नमाज़ रोज़ न पढ़ सके तो हफ्ते में एक बार वो भी न हो तो महीने में एक बार तो ज़रूर पढ़े।

सलातुल तस्बीह नमाज़ का तरीका

4 रकात नफ़्ल नमाज़ की नियत करे और नियत करने के बाद 15 बार सुब्हानल्लाहे वल्हम्दुलिल्लाहे व लाइलाहा इल्लल्लाहो वल्लाहो अकबर पढ़े अल्हम्दो और सूरत पढ़ने के बाद रुकू में जाने पहले यही तस्बीह 10 बार पढ़े रुकू में सुब्हान रब्बियल अज़ीम पढ़ लेने के बाद 10 बार रुकू से उठने के बाद सजदे में जाने से पहले 10 बार सजदे में जाने पर सुब्हान रब्बियल आला पढ़ लेने के बाद 10 बार फिर दूसरे सजदे में 10 बार यही तस्बीह पढ़े इस तरह हर रकात में 75 बार यह तस्बीह पढ़ी जाएगी और 4 रकात में 300 बार हो जाएगी।

अल्लाह पाक हम मुसलमानो को इस मुबारक रात की बरकतो से नवाज़े और अपनी इबादत की तौफीक बक्शे आमीन।

लैलतुल क़द्र या शबे क़द्र क्या हैं? What is Lailatul Qadr or Shabe Qadr

लैलतुल क़द्र या शबे क़द्र क्या हैं? What is Lailatul Qadr or Shab-e-qadr

रमज़ान महीने की एक रात को लैलतुल कद्र कहा गया हैं। जो खैर व बरकत के एतबार से हज़ार महीनों से भी अफ़ज़ल रात हैं। उसी लैलतुल कद्र को कहीं कहीं शबे कद्र भी कहा जाता हैं। तो कुछ जगह इसे 27 वी शब भी कहा जाता हैं। हदीस के मुताबिक यह रात रमज़ान की 21, 23, 25, 27, 29 वी रात में से कोई एक रात हैं। कुछ बुज़ुर्गो ने 27 वी रात को ही लैलतुल कद्र माना हैं।

इस रात को लैलतुल कद्र इसलिए फ़रमाया गया हैं क्यूंकि इसी रात साल भर के लिए आर्डर जारी होते हैं। ज़िम्मेदार फ़रिश्ते अपने अपने रजिस्टरों में अगले साल होने वाले सारे काम लिख लेते हैं। और अल्लाह के हुक्म के मुताबिक अपने अपने काम अंजाम देते रहते हैं। इसी रात हज़रत आदम सफ़ीयुल्लाह अलैहिस्सलाम का बदन बनाने का सामान आसमान पर जमा किया जाने लगा। इसी रात हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम आसमान पर उठाये गए और इसी रात बनी इसराइल कौम की तौबा क़बूल हुई।

यह रात इबादत की लिए खास हैं। बुखारी शरीफ की हदीस हैं अल्लाह के रसूल फरमाते हैं जो आदमी ईमान व खुलूस के साथ इस रात जागकर अल्लाह की इबादत करेगा या कहे नमाज़ क़ुरान पढ़ेगा। अल्लाह पाक अपने करम से उसके साल भर के गुनाह माफ़ फ़रमा देगा। इस लिए इस कीमती रात को यूं ही नहीं बिताना चाहिए। इस रात इबादत करने वाले को 83 साल 4 महीने से भी ज़्यादा इबादत करने का सवाब मिलता हैं। अल्लाह के रसूल फरमाते हैं जो आदमी इस रात महरूम रह गया या कहे जो आदमी इस रात इबादत नहीं कर सका गोया वह हर तरह के सवाब से महरूम रह गया।

आजकल देखा जाता हैं की कुछ नौजवान इस रात इबादत करने की बजाय सड़को पर तेज़ रफतार में मोटरबाइक दौड़ाते हुए नज़र आते हैं। आमजन को परेशान करते हैं। मस्जिद में इबादत करने की बजाय बाहर बैठकर सिगरेट बीड़ी फूँकते नज़र आते हैं। कुछ नौजवान आस पास की दरगाह में जाकर बेमतलब वक़्त ज़ाया करते हैं। और सेहरी होने तक ऐसे ही पूरी रात निकल लेते हैं। ऐसे लोग अल्लाह की नज़र में बहुत बड़े गुनहगार कहलायेंगे जो इबादत करने की बजाये इस तरह इस रात को इस तरह बर्बाद कर देते है। अल्लाह ऐसे लोगो को हिदायत दे।

इस लिए रमज़ान के मुबारक महीने और इस महीने की इस मुबारक रात की कद्र कीजिये इस रात ज़्यादा से ज़्यादा इबादत करके अपने गुनाहो से माफ़ी मांगे। इस रात बाज़ारो में आवारा गर्दी करने या घूमने की बजाये नौजवानो को मस्जिद या अपने घरों में इबादत करके अल्लाह से अपने गुनाहो की माफ़ी और आगे की ज़िन्दगी अच्छे से गुज़ारने,बीमारियों,मुहताजी से बचने अमन की ज़िन्दगी गुज़ारने की दुआ मांगनी चाहिए। अल्लाह हम सब को इस रात में इबादत करने की तौफीक अता फरमाए आमीन।

आयतें शिफा क्या है? जानिए इसे पढ़ने के अद्भुत फायदे

इस्लाम एक दीन है जो हर समस्या का हल पेश करता है, चाहे वह रूहानी हो या जिस्मानी। इस्लामिक शिक्षाओं में कुरान मजीद को सबसे महत्वपूर्ण माना जात...

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