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कुर्सी पर बैठ कर नमाज़ पढ़ने के अहकाम (Kursi Par Namaz K Ahkam)

कुर्सी पर बैठ कर नमाज़ पढ़ने के अहकाम (Kursi Par Namaz K Ahkam)

कुर्सी स्टूल सोफा वगैरह जैसी ऊँची चीज़ पर बैठ कर नमाज़ पढ़ना जायज़ नहीं  मरीज़ और मजबूर आदमी ज़मीन पर नमाज़ अदा करे क्यूंकि ऊँची चीज़ पर बैठ कर नमाज़ अदा करने को सरकार ने मना फ़रमाया हैं।

हज़रत जाबिर रदियल्लाहो अन्हो का बयान हैं, अल्लाह के रसूल एक मरीज़ को पूछने के लिए तशरीफ़ ले गए। आपने देखा की वह किसी तकिये पर बैठ कर नमाज़ अदा कर रहे हैं। नमाज़ हो जाने पर आपने फ़रमाया ज़मीन पर नमाज़ पढ़ो अगर इसकी ताकत न हो तो इशारे से नमाज़ पढ़ो और सज्दा को रुकू से कुछ नीचा करो। छोटी छोटी तकलीफो वाला मजबूर नहीं। मरीज़ वह हैं जो नमाज़ के अरकान सही तरीके से अदा करने से मजबूर हो। आजकल अक्सर देखने में आता हैं की मामूली सा बुखार आया या कोई मामूली से तकलीफ होने लगी तो बैठ कर नमाज़ शुरू कर दी इस तरह नमाज़ नहीं होती और पढ़ ली तो वह दोबारा पढ़नी चाहिए।

हज़रत इमरान बिन हसीन रदियल्लाहो का बयान हैं मै बीमार था तो सरकार से नमाज़ पढ़ने के बारे में पूछा। आका ने फ़रमाया ! खड़े होकर पढ़ो अगर खड़े होकर पढ़ने की ताकत न हो तो बैठ कर पढ़ो और अगर बैठने की भी हिम्मत न हो तो लेट कर पढ़ो।

अल्लाह पाक किसी बन्दे को उसकी हिम्मत से ज़्यादा तकलीफ नहीं देता। इस हदीस से अंदाज़ा हुआ की किसी ऊँची चीज़ पर जैसे की कुर्सी, स्टूल, सोफा वगैरह पर बैठ कर नमाज़ पढ़ना और रूकु सज्दा इशारे से करना दुरुस्त नहीं। नमाज़ ज़मीन पर ही बैठ कर अदा करे जिस तरह भी हो सके जैसा भी आसान व मुमकिन हो बैठ कर नमाज़ पढ़े।

अगर बैठ नहीं सकते तो दीवार वगैरह से टेका लगा कर पढ़े अगर टेका लगाना भी मुश्किल हो तो फिर लेटे लेटे पढ़े। अगर मरीज़ खड़ा हो सकता हैं लेकिन रूकु सज्दा नहीं कर सकता तो खड़े खड़े नमाज़ अदा करे, अगर रूकु नहीं कर सकता तो इशारे से रूकु करे और ज़मीन पर बैठ जाये और इशारे से सज्दा करे।

नमाज़ के लिए बीच में कुर्सी लगाने से सफ़ भी टूटती हैं। सफ़ सीधी व बराबर नहीं रह पाती कंधे से कंधा नहीं मिलता और सफ़ के बीच जगह खली रह जाती हैं। सफ़े सीधी रखना सुन्नत हैं। सरकार ने फ़रमाया ! सफ़ो को सीधा करो खाली जगह को बंद कर दो, शैतान के लिए बीच में कोई जगह न छोड़ो।जिसने सफ़ो को मिलाया अल्लाह उसे मिलाएगा। जिसने सफ़ को काटा अल्लाह की रहमत उससे अपना रिश्ता तोड़ लेगी।

एक और हदीस पढ़ते चले, हज़रत नोमान बिन बशीर रदियल्लाहो अन्हो फरमाते हैं ! सरकार हमारी सफ़े तीर की तरह सीधी करते हैं। एक दिन की बात हैं सरकार तशरीफ़ लाए तकबीर होने ही वाली थी की आपने एक नमाज़ी का सीना सफ़ से बाहर निकलते देखा। आपने फ़रमाया ! अल्लाह के बन्दों अपनी सफ़े तीर की तरह सीधी और बराबर किया करो वरना अल्लाह पाक तुम्हारे बीच इख़्तेलाफ़ (दरार) दाल देगा।

जुमा हो या ईद, बकरा ईद या आम दिन जो आदमी खड़ा हो सकता हैं अगर कुर्सी पर बैठ कर रूकु सज्दा करेगा तो उसकी नमाज़ नहीं होगी। अफ़सोस हैं की जो लोग गाड़ी चला लेते हैं पैदल चल लेते हैं घंटो खड़े खड़े यार दोस्तों के साथ बातें कर लेते हैं, और मस्जिद में आते ही बीमार मजबूर बन कर कुर्सियों का सहारा लेकर नमाज़ पढ़ने लगते हैं। ऐसे लोगो की नमाज़ नहीं होती। मस्जिद में इस तरह की चीज़ो से बचना चाहिए। अगर आप में हिम्मत हैं खड़े खड़े नमाज़ पढ़ने की तो कोशिश करे की उसी हिम्मत से मस्जिद में नमाज़ अदा करे ।

नमाज़े जनाज़ा और उसका तरीका

नमाज़े जनाज़ा और उसका तरीका

नमाज़े जनाज़ा “फ़र्ज किफ़ाया” है यानी कोई एक भी अगर अदा कर ले तो सब जिम्‍मेदारी से बरी हो गए वरना जिन जिन को ख़बर पहुंची थी और नहीं आए वो सब गुनहगार होंगे।

आइये इस नमाज़ के तरीके के बारे में जानते हैं।

नियत की मैंने नमाज़े जनाज़ा की 4 तकबीरों के साथ,सना वास्ते अल्लाह तआला के, दुरुद वास्ते रसुल्लाह के, दुआ वास्ते इस मैयत के, पीछे इस इमाम के, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाहो अकबर। फिर सूरह सना पढ़े।

सुबहानका अल्लाहुम्मा व बिहम्दीका व ताबरकस्मुका व तआला जद्दुका व जल्ला सनाउका व लाइलाहा गैरूका

इमाम साहब दूसरी बार अल्लाहो अकबर कहे तो दुरूदे इब्राहिम जो नमाज़ में अतहियात के बाद पढ़ी जाती हैं पढ़े।

अल्लाहुम्मा सल्लि अला सयैदीना मुहम्मादिव व अला आलि सयैदीना मुहम्मदिन कमा सल्लैता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीमा इन्नका हमीदुम मजीद अल्लाहुम्मा बारिक अला सयैदीना मुहम्मादिव व अला आलि सयैदीना मुहम्मदिन कमा बारकता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीमा इन्नका हमीदुम मजीद

इमाम साहब तीसरी बार अल्लाहो अकबर कहे तो अगर जनाज़ा किसी बालिग मर्द या औरत का हो तो यह दुआ पढ़े !
अल्लाहुम्मग़्फ़िरली हय्यिना व मय्यितिना व शहीदीना व ग़ाइबिना व सग़ीरिना व कबीरिना व ज़कारिना व उन्साना अल्लाहुम्मा मन अहयैतहु मिन्ना फ़अहयेही अलल इस्लामी व मन तवफ़्फ़इतहू मिन्ना फ़तवफ़्फ़हू अलल ईमान

और अगर नाबालिग लड़के का जनाज़ा हो तो ऊपर वाली दुआ के बजाये यह दुआ पढ़े !

अल्लाहुम्मज अल्हो लना फरतौ वज अल्हो लना अजरौ व ज़ुखरौ वज अल्हो लना शाफीओ व मुशफ्फआ और अगर नाबालिग लड़की का जनाज़ा हो तो फिर इस के बजाय यह दुआ पढ़े ! अल्लाहुम्मज अल्हा लना फरतौ वजअल्हा लना शफीअतो व मुशफ्फअ

चौथी बार इमाम साहब अल्लाहुअक्बर कहे तो हाथ नीचे लटका दे। फिर सलाम फेरे।

तहज्जुद की नमाज़ और उसकी फ़ज़ीलत (Tahajjud ki Namaz)

तहज्जुद की नमाज़ और उसकी फ़ज़ीलत (Tahajjud ki Namaz)

हम सब पर 24 घंटे में पांच वक्त की नमाज़ फ़र्ज़ है, लेकिन हमारे प्यारे आका हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर 6 वक्त की नमाज फ़र्ज़ थी। एक खास नमाज़ जो रात के पिछले पहर पढ़ी जाती है जिसे तहज्जुद की नमाज़ कहा जाता है। यह नमाज हमारे लिए सुन्नत है। खुश नसीब है वह लोग जो इस नमाज़ के पाबंद हैं। इसके बारे में अल्लाह तबारक व तआला ने फरमाया बेशक, रात में उठना (तहज्जुद की नमाज़ पढ़ना) नफ़्स को कुचलने के लिए बहुत सख्त हैं। इसकी बदौलत हर काम दुरस्त होते हैं।

अल्लाह के रसूल फरमाते हैं! आदमी जब सो जाता है तो शैतान उसकी गुद्दी (सिर का पिछले हिस्सा) में 3 गांठे लगा देता है और हर गांठ पर कहता है! अभी बहुत रात बाकी है कुछ देर और सो जा अगर आदमी उठकर अल्लाह का नाम लेता है तो एक गांठ खुल जाती है। जब वज़ू करता है तो दूसरी गांठ खुल जाती है। और जब नमाज पढ़ने लगता है तो तीसरी गांठ भी खुल जाती है। ऐसा आदमी सुबह उठने पर खुशी महसूस करता है और उसका बदन हल्का और तरोताजा हो जाता है। अगर वह ऐसा नहीं करता है तो उसका बदन सुस्त और बदमिज़ाज रहता है। शैतान के पास नाक की दवा, चाटने और  छिड़कने की चीजें रहती हैं जब वह किसी इंसान की नाक में दवा डालता है तो वह बदमिज़ाज व बदअख़लाक़ हो जाता है। जब शैतान चाटने की दवा देता है तो बद्तमीज़ और बदज़बान हो जाता है, और जब शैतान आदमी पर दवा छिड़क देता है तो वह सुबह तक सोता रहता है।

हदीस शरीफ में है प्यारे रसूल हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं आधी रात को उठकर 2 रकात नमाज़ पढ़ना दुनिया और उसकी सारी चीजों से बेहतर है। अगर मुझे अपनी उम्मत की तकलीफ का ख्याल ना होता तो यह नमाज (तहज्जुद की नमाज़) भी मैं उन पर जरूरी करार दे देता।

रात में एक लम्हा ऐसा भी होता है कि बन्दा अगर उस वक़्त दुनिया और आख़िरत की भलाई के लिए अपने रब से दुआ करें तो अल्लाह तआला उसकी दुआ को कबूल फरमा लेता है।

हज़रत मुगीरा बिन शोअबा रदियल्लाहो अन्हो का बयान है एक बार रात में अल्लाह के रसूल इतनी देर नमाज के लिए खड़े रहे कि आपके पैरों में वरम आ गया। सहाबा ने आपकी यह हालत देखी तो कहने लगे या रसूलल्लाह ! अल्लाह ने तो आपके अगले पिछले सब गुनाह माफ फरमा दिए है फिर आप इतनी तकलीफ क्यों उठाते हैं? आपने जवाब देते हुए फरमाया तो क्या मैं अपने रब का शुक्रगुजार बन्दा न बनूँ? अल्लाह का वादा है की अगर तुम मेरा शुक्र अदा करोगे तो मैं तुम्हें और दूंगा।

हज़रत अबू हुरैरा रदियल्लाहो अन्हो का बयान है आका ने हमसे फरमाया अगर तुम चाहते हो कि जिंदगी, मौत, कब्र, हश्र में तुम पर अल्लाह की रहमत नाज़िल हो तो रात के पिछले पहर अपने रब की रज़ा के लिए इबादत किया करो। अपने घरों में भी नमाज़े पढ़ा करो, जिससे तुम्हारा घर आसमान से ऐसा चमकता नज़र आएगा जैसा की ज़मीन वालों को आसमान पर चमकते तारे दिखाई देते हैं।

हदीस शरीफ में है तहज्जुद की नमाज की बरकत से बंदे को अल्लाह का क़ुर्ब (अल्लाह के करीब) हासिल होता है। बन्दे के  गुनाह माफ होते हैं। बीमारियां दूर होती हैं। वह गुनाहों से बचता है। हजरत अबू ज़र गिफारी रदियल्लाहो अन्हो को तालीम देते हुए अल्लाह के रसूल ने फरमाया कयामत के अज़ाब से बचने के लिए सख्त गर्मी के दिनों में रोज़ा रखा करो, कब्र की वहशत दूर करने के लिए अँधेरी रात में दो 2 रकात नमाज नफ़्ल पढ़ा करो। हज करो, गरीबो को खैरात दो, हक़ बात बोलो और बुरी बात से ज़बान को रोको।

नबीए रहमत के ज़माने में एक साहब ऐसे थे की जब लोग रात को सो जाते थे तो वह साहब नमाज के लिए खड़े हो जाते और कुरान की तिलावत करते और दुआ मांगते की ए इलाही ! ए परवरदिगार ! मुझे जहन्नम से बचा। लोगों ने उनके बारे में जब रसूल अकरम को खबर दी तो आपने एक रात और खुद उनकी कैफियत देखी और दुआ सुनी तो सुबह को फरमाया ! तुमने अल्लाह से जन्नत के लिए दुआ क्यों नहीं मांगी ? वह बोले या रसूलल्लाह! मैं जन्नत का सवाल कैसे करता ! अभी तो मैं जन्नत का सवाल करने के काबिल ही नहीं हुआ हूँ। इतने में हज़रत जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने आकर खबर दी या रसूलल्लाह आप उन्हें बशारत सुना दें की अल्लाह ने उन्हें जहन्नम से बचाकर जन्नत में दाखिल फरमा दिया हैं।

प्यारे रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम के नाम पर अंगूठा चूमना

प्यारे रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम के नाम अंगूठा चूमना

सदियों से हम खुश अक़ीदा मुसलमानों का यह तरीका चला आ रहा है की जब भी हम अपने प्यारे आका का प्यारा नाम सुनते हैं, अजान को सुनकर या कही भी तो बड़ी मोहब्बत से अपने दोनों अंगूठो को चुम कर कलमे कि दोनों अंगुलियों को आंखों से लगा देते हैं। लेकिन कुछ सालों से ऐसी जमाअते पैदा हो चुकी है और होती जा रही है जो इस काम को गलत बताते हैं और ऐसा न करने की सलाह देते हैं। उन के चक्कर में आकर काफी लोग इस सआदत (अच्छाई) से मरहूम होते जा रहे हैं। ऐसी जमात के लोग अपने बच्चों को मोहब्बत से चूमते हैं तो चलता है और अपने आका का नाम सुनकर सुन्नते सिद्दीकी अदा करते हैं तो उनका दिल जलता है। देखिए यह मोहब्बत और अकीदत की बात है हम अपने रसूल से मोहब्बत हैं इसलिए हम ऐसा करते हैं।

एक रिवायत हैं की एक दिन जब हजरत अबू बकर सिद्दीक रदियल्लो अन्हो ने मुअज़्ज़िन की ज़बानी जब अशहदो अन्ना मुहम्मदर रसुल्लाह सुना तो यह दुआ पढ़ी "अशहदो अन्ना मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलुहु रदीतो बिल्लाहे रब्बन व बिल इस्लाम दिनन व बिमुहम्मदिन सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम नबिया" ( मैं इस बात की गवाही देता हूँ की मुहम्मद सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम अल्लाह के बंदे और रसूल है मैं इस बात से खुश हूँ कि अल्लाह मेरा रब है, इस्लाम मेरा दीन हैं और मुहम्मद सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम मेरे नबी हैं) फिर कलमे की दोनों अंगुलियों को अंदर की तरफ से चुम कर आंखों से लगा लिया। आपको ऐसा करते देखा तो अल्लाह के प्यारे रसूल ने फ़रमाया, जिसने ऐसा किया जैसा कि मेरे खलील (दोस्त) ने किया, उस पर मेरी शफ़ाअत हलाल हो गई।

हज़रत अबूल अब्बास अहमद बिन अबू बकर रूदाद यमनी अपनी किताब मुजिबाते रहमत में तहरीर फरमाते हैं की हजरत खिजर अलैहिस्सलाम फरमाते हैं, जो आदमी मुअज़्ज़िन की ज़बानी "अशहदो अन्ना मुहम्मदर रसुलल्लाह सुनकर मरहबा बिहबीबी व कर्रतो ऐनी मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम" पढ़े। फिर अपने दोनों अंगूठो को चूम कर उसे अपनी आंखों से लगा ले तो उसकी आंखों में कभी तकलीफ नहीं होगी।

हज़रत फकीह मोहम्मद बिन अलबाब का बयान है कि एक बार ऐसी तेज़ हवा चली की एक कंकड़ी उड़ कर उनकी आंखों में आ लगी। उसके टुकड़े आंखों में जा घुसे। उन्हें निकालते निकालते वह थक गए। तकलीफ बढ़ती गई। इसी दौरान आपने अज़ान की आवाज़ सुनी। मुअज़्ज़िन ने जब "अशहदो अन्ना मुहम्मदर रसुलल्लाह" पढ़ा तो उन्होंने वही हज़रत खिजर अलैहिस्सलाम की बताई दुआ पढ़ी। दुआ पढ़ते ही अल्लाह के करम से वह टुकड़े आपकी आंखों से निकल गए और तकलीफ दूर हो गई।  सुब्हानल्ला

इसी तरह ऐसे सैकड़ों उलेमाओं ने अपने अपने किताबों में इस अमल को जायज़ करार दिया है। अल्लाह हम सबको इस पर अमल करने की तौफीक दे। आमीन 

सदक़ा करने के फायदे (Benefits Of Sadqa)

सदक़ा करने के फायदे (Benefits Of Sadqa)

किताबों में आया हैं की एक बार हज़रत बीबी फ़ातिमा बीमार हो गयी I हज़रत अली शेरे खुदा आपके पास आये तो आपने उनसे पूछा- आपको किसी चीज़ के खाने की ख्वाहिशें हो तो बताओ? बीबी फ़ातिमा ने फ़रमाया ! इस वक़्त मेरा अनार खाने का मन कर रहा हैंI बीबी फ़ातिमा की ख़्वाहिश सुनकर हज़रत अली दिल ही दिल में तड़प उठेI क्यूंकि उनके पास अनार खरीदने के पैसे नहीं थेI बहरहाल आप बहार निकले और किसी तरह पैसो का इंतेज़ाम करके बाजार पहुंचे और एक अनार खरीद कर घर की तरफ लौट ही रहे थे की रास्ते में एक फ़क़ीर मिला I जिसके दोनों हाथ नहीं थे और वह काफी बीमार लग रहा थाI उस फ़क़ीर को देख कर आप ठहर गएI फ़क़ीर के पास रुकते ही उस फ़क़ीर ने वह अनार खाने के ख़्वाहिश की I उस वक़्त हज़रत अली सोच में पड़ गए की यह अनार तो वह अपनी बीवी हज़रत फ़ातिमा के लिए ले जा रहे थे और यह फ़क़ीर भी अब यह अनार मांग रहा हैं I

आपने उस वक़्त उस बीमार फ़क़ीर को मायूस करना मुनासिब नहीं समझा और वह अनार उसे अपने हाथो से खिला दिया I वह बीमार फ़क़ीर आपसे बड़ा खुश हुआ I जिसकी ख़ुशी देखकर आपको भी बड़ा सुकून मिला I खाली हाथ दिल में न जाने क्या क्या सोचते हुए आप घर पहुंचे तो आपने देखा की बीबी फ़ातिमा बिलकुल ठीक होकर आराम से बैठी हुई हैं I आपने बाजार जाने और वापिस आने का सारा हाल बीबी फ़ातिमा को सुनाया तो आपने तसल्ली देते हुए फ़रमाया ! आपको घबराने की ज़रूरत नहीं I उधर आपने मेरे लिए ख़रीदा अनार उस बीमार को खिलाया और इधर अल्लाह ने मुझे सेहत अता फरमा दी, अब मेरे दिल में अनार खाने की तमन्ना ही न रही ये सब सुनकर हज़रत अली बड़े खुश हुए I

इतने में किसी ने दरवाज़े पर दस्तक दी हज़रत अली ने पूछा कौन? बाहर से जवाब मिला सलमान फ़ारसी I  आपने दरवाज़ा खोला तो देखा की हज़रत सलमान कपड़े से ढका हुआ एक थाल लेकर हाज़िर हैंI हज़रत अली ने पूछा यह क्या हैं? और यह कहाँ से आया है? हज़रत सलमान ने जवाब दिया अल्लाह की तरफ से रसूले खुदा की खिदमत में आया था और अल्लाह के रसूल ने इसे हदिया के तौर पर आपके पास भेजा हैंI आपने कपडा उठा कर देखा तो उसमे नौ अनार थे I हज़रत अली ने फ़रमाया अगर यह हदिया अल्लाह की तरफ से आया होता तो इस में दस अनार होते क्यूंकि अल्लाह पाक एक के बदले कम से कम दस तो अता फरमाता ही हैंI आपकी यह बात सुनकर हज़रत सलमान मुस्कुरा दिए और अपनी आस्तीन में छुपाया एक और अनार थाल में रखते हुए फ़रमाया - हज़रत अली ! मैने आपको आज़माने के लिए ऐसा किया था I

सदक़ा एक नेअमत हैं I यह बहुत सारी बालाओं को टाल देता हैं I इसलिए सदक़ा करते रहने चाहिए I अल्लाह पाक बड़ा रहीम व करीम हैं वह अपने बन्दों को उनकी नेकियों का सवाब बढ़ा चढ़ा कर अता फरमाता हैं शर्त यही हैं की नियत अच्छी हो I हम जो कुछ भी करे या दे वह अल्लाह की रज़ा के लिए करे ताकि हमें हमारी नेकियों का भरपूर सवाब मिले और अल्लाह पाक भी राज़ी हो जाये I 

ग़ुस्ल करने का तरीक़ा (Gusl Ka Tarika in Hindi)

ग़ुस्ल करने का तरीक़ा (Gusl Ka Tarika in Hindi)


इस्लाम पाक व साफ़ मज़हब हैं। वह पाकीज़गी को पसंद करता हैं। जहाँ क़ुरान व हदीस में रूह को पाक व साफ़ करने रखने के तरीके बताये गए हैं, वही बदन को भी पाक साफ़ रखने की सख्त ताकीद आयी हैं। बदन को साफ़ पाक रखना भी ईमान का एक अहम हिस्सा हैं, क्यूंकि बदन की पाकी के बिना कोई इबादत अदा व मकबूल नहीं हो सकती।

पाकी नापाकी के सिलसिले में सही जानकारी न होने की वजह से अक्सर लोग बहुत सी नेकियों से महरूम रह जाते हैं। आपने खुद सुना होगा की किसी को नमाज़ के लिए मस्जिद चलने के लिए कहा तो जवाब मिला अरे साहब ! चलता तो ज़रूर लेकिन क्या करुँ नापाक हो गया हूँ। कपड़ो पर छींटे लग गए हैं। मालूम होना चाहिए की नापाक पानी या पेशाब के छींटे लगने से आदमी ऐसा नापाक नहीं हो जाता की वह नहाये बिना नमाज़ नहीं पढ़ सकता। ऐसा आदमी बदन या कपड़े पर लगे छींटो को धोकर पाक हो जायेगा। नहाने की ज़रूरत नहीं सोचिये छोटी सी नादानी से कितना बड़ा नुकसान होगा।

हाँ ग़ुस्ल करना बेहद ज़रूरी हैं सवाल आता हैं कब? जवाब हैं हमबिस्तरी के बाद, या एहतलाम हो जाने पर इसी तरह औरत जब माहवारी से फ़ारिग़ हो जाये तब नहाना वाजिब हो जाता हैं। ऐसा ग़ुस्ल वाजिब हो जाये तो सबसे पहले यह ध्यान रहे की नापाक कपडा पहन कर हरगिज़ न नहाये बल्कि उसे उतर कर पाक कर ले। बदन पर जहाँ नापाकी लगी हैं, उसे अच्छी तरह धो डालें इसी तरह अगर पेशाब करने के बाद पानी से पाकी नहीं हासिल की हैं तो वह चड्डी, पायजामा, लुंगी या पेंट पहन कर न नहाये। उसे धोकर पाक कर ले वर्ना उसकी नापाकी पानी के साथ फैल कर पुरे बदन तक पहुँच जाएगी।

पाकी हासिल करने और पाक होने की नियत से ग़ुस्ल करे। सबसे पहले दोनों हाथ कलाइयों तक अच्छी तरह धो ले, बदन पर लगी नापाकी दूर कर ले और तीन बार इस तरह कुल्ली करे की पानी हलक तक पहुँच जाये। इसी तरह तीन बार नाक के अंदर पानी डालकर हल्की साँस से ऊपर खींचे की पानी नाक की ऊपरी हड्डी तक पहुँच जाये। वहां पानी पहुंचाकर निकाले अगर लापरवाही बरती और पानी ऊपर तक नहीं चढ़ाया तो फिर ग़ुस्ल नहीं होगा।

कुल्ली करने और नाक में पानी चढ़ाने के बाद वज़ू कर ले और फिर बदन पर पानी डालें। पहले दाहिने तरफ फिर बायीं तरफ पानी डालकर मले और इतना ध्यान रखे की बाल बराबर भी जगह कही सुखी न रहने पाए। सर व दाढ़ी के बालो की जड़ो तक पानी पहुँचाना फ़र्ज़ हैं। सर्दियों में खास ध्यान रखे क्यूंकि पानी बड़ी मुश्किल से अंदर पहुँचता हैं। इसी तरह पाँव की अंगुलियां और नाफ में अंगुली घुमा कर पानी पहुंचाए। औरतो को चाहिए की नहाते वक़्त अपने कान व नाक के ज़ेवरों को घुमा लिया करे ताकि पानी सुराख़ में पहुँच जाये वर्ना पाक नहीं होगी।

एक बार बदन गीला करने के बाद साबुन वगैरह लगा कर फिर पुरे बदन पर पानी बहाये ताकि साबुन वगैरह धुल कर साफ़ हो जाये और फिर आखिर में मैल वगैरह छुड़ा कर पुरे बदन पर पानी बहाये। इस तरह बहाये की बदन के हर हर हिस्से से बहकर निचे गिर जाये। बदन से पानी बाह जाना ज़रूरी हैं। बदन गीला करना काफी नहीं।

एक बात का ध्यान रखे, ऐसी जगह बैठ कर न नहाये जहाँ ग़ुस्ल का पानी जमा हो जाता हैं। कुछ ऊँची जगह होनी चाहिए ताकि पानी बह जाया करे। इसी तरह अगर लोटे बाल्टी से नहा रहे हो तो इस बात का ख्याल रखे की पानी के छींटे बाल्टी में न पड़ने पाए वर्ना पानी नापाक हो जायेगा और वह पानी नहाने के काबिल नहीं रहेगा।

हमेशा पाक साफ़ रहने की कोशिश करे क्यूंकि अल्लाह पाक अपने बन्दों को पसंद फरमाता हैं जो पाक साफ़ रहते हैं।

पैगम्बर हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की कहानी (Story of Prophet Ibrahim)

पैगम्बर हज़रत इब्राहिम की कहानी (Story of Prophet Ibrahim)

बाबुल (ईरान का एक शहर) के लोग बुतों की पूजा किया करते थेI वहां आज़र नाम का एक आदमी बहुत खूबसूरत बुत बनाया करता थाI लोग उसकी बड़ी इज़्ज़त किया करते थेI उसके घराने में एक दिन एक लड़का पैदा हुआ I जिसका नाम इब्राहिम रखा गया I बच्चे की परवरिश एक अमीरज़ादे की हैसियत से होने लगी I बच्चा तेज़ी से बढ़ने लगा I बचपन से ही उसने अपने घर में मूर्तियों का कारखाना देखना शरू कर दिया I बच्चा कुछ बड़ा हुआ तो सोचने लगा यह सब क्या हैं?लोग इसका क्या करेंगे? कुछ और बड़ा होने पर पता चला की घर में बनने वाली यह मूर्तियां बुतखानो में पहुँच कर देवता बन जाती हैं I

फिर लोग इनकी पूजा करते हैं बच्चा सोचने लगा, हमारे घर में बनने वाली पत्थर की यह मूर्तियां देवता कैसे हो जाती हैं? चुनांचे एक दिन आपने घर वालो को उनके बारे में कुछ जानकारी हासिल करनी चाही तो जवाब मिला, अभी तुम छोटे हो यह बातें तुम्हारी समझ से बाहर हैंI यही हमारे बाप दादाओं का तरीका हैं, और हम भी उन्ही के तरीको पर अमल करते आ रहे हैंI फिर भी बच्चे यानि हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को तसल्ली नहीं हुई I

इसी तरह देखते सुनते बच्चा बड़ा हो गया I कोई उसे तसल्ली भरा जवाब न दे सका I उसने अपने दिल में सोचा मेरे ख्याल के मुताबिक अगर यह मूर्तियां देवता नहीं हैं, तो फिर दुनिया को पैदा करने वाला और मालिक कौन हैं? किसकी वजह से से ये पूरी कायनात चल रही हैं? इसी सोच में एक रात हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम घर से बाहर आये ऊपर नज़र डाली तो आसमान पर एक तारा बड़ा ज़ोरदार रौशनी बिखेरते हुए नज़र आया I आप सोचने लगे क्या यही खुदा हो सकता हैं? आप अभी कुछ फैसला न कर पाए की थोड़ी देर बाद चाँद निकल आया I उसकी रौशनी के आगे तारे की रौशनी काम पड़ गयी I आपने फिर सोचा क्या यह खुदा होगा? रात बीतती रही यहाँ तक की सुबह की सफेदी ज़ाहिर हुई और थोड़ी देर बाद सूरज निकल आया सूरज को देखकर आपने मन में सवाल किया, यह तो तारे और चाँद से भी ज़्यादा रौशनी वाला और ताकतवर नज़र आ रहा हैं, तो क्या यह खुदा होगा?

शाम होते होते सूरज की रौशनी भी कम हो गयी और सूरज डूब गया फिर आपने एलान फ़रमाया यह सब खुदा नहीं बल्कि खुदा की मखलूक हैंI  इन सबको पैदा करने वाला और सारे जहाँ का पालनहार ही खुदा हैंI मै उसी पर ईमान रखता हूँ, उसे ही अपना माबूद मानता हूँ I चाँद तारो और सूरज की पूजा करने वाले और उन्हें अपना खुदा मानने वाले गलत हैंI

इस तरह आप हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम हकीकत की जिस मंज़िल पर पहुँच चुके थे, और लोगो को भी वहाँ तक पहुँचाना चाहते थेI  फिर उन्होंने लोगो को एक खुदा के बारे में समझाना शुरू कर दिया, लेकिन लोग बिन देखे खुदा की इबादत करने के लिए राज़ी नहीं हुए I क्यूंकि वह बरसों से जिनकी पूजा करते चले आ रहे थे, उन्हें छोड़ना आसान नहीं था I आपने उन्हें बहुत समझाया लेकिन लोग उस खुदा को मानने के लिए तैयार न हुए I इस बात की वजह से लोगो ने आपके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया I यहाँ तक की इस बात से खफा होकर उस वक़्त वहाँ के बादशाह ने आपको आग के दहकते हुए अंगारो में डाल दिया I आग के दहकते अंगारो में डालने के बावजूद आग आपको जला न सकी I क्यूंकि आप को खुदा पर पूरा भरोसा था और खुदा ने आपको जलने से बचा लिया I

आपने हक़ की राह में बड़ी बड़ी कुर्बानियां पेश फ़रमाई हैंI अल्लाह की राह में उसकी रज़ा के लिए आपने अपना वतन तक छोड़ दिया I आपने अपने चहिते बेटे को अल्लाह राह में कुर्बान करने को तैयार हो गए I लेकिन खुदा का करिश्मा ऐसा था की ऐसा होने नहीं दिया I इसी करिश्मे की याद में आज बकरा ईद का त्यौहार मनाया जाता हैं I अल्लाह पाक ने आपको हर इम्तेहान में कामयाबी और दुनिया व आख़िरत की सुखरूई बख्शी I आपको खुदा की और से पैगम्बर का दर्जा दिया गया I

आयतें शिफा क्या है? जानिए इसे पढ़ने के अद्भुत फायदे

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