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प्यारे रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम के नाम पर अंगूठा चूमना

प्यारे रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम के नाम अंगूठा चूमना

सदियों से हम खुश अक़ीदा मुसलमानों का यह तरीका चला आ रहा है की जब भी हम अपने प्यारे आका का प्यारा नाम सुनते हैं, अजान को सुनकर या कही भी तो बड़ी मोहब्बत से अपने दोनों अंगूठो को चुम कर कलमे कि दोनों अंगुलियों को आंखों से लगा देते हैं। लेकिन कुछ सालों से ऐसी जमाअते पैदा हो चुकी है और होती जा रही है जो इस काम को गलत बताते हैं और ऐसा न करने की सलाह देते हैं। उन के चक्कर में आकर काफी लोग इस सआदत (अच्छाई) से मरहूम होते जा रहे हैं। ऐसी जमात के लोग अपने बच्चों को मोहब्बत से चूमते हैं तो चलता है और अपने आका का नाम सुनकर सुन्नते सिद्दीकी अदा करते हैं तो उनका दिल जलता है। देखिए यह मोहब्बत और अकीदत की बात है हम अपने रसूल से मोहब्बत हैं इसलिए हम ऐसा करते हैं।

एक रिवायत हैं की एक दिन जब हजरत अबू बकर सिद्दीक रदियल्लो अन्हो ने मुअज़्ज़िन की ज़बानी जब अशहदो अन्ना मुहम्मदर रसुल्लाह सुना तो यह दुआ पढ़ी "अशहदो अन्ना मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलुहु रदीतो बिल्लाहे रब्बन व बिल इस्लाम दिनन व बिमुहम्मदिन सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम नबिया" ( मैं इस बात की गवाही देता हूँ की मुहम्मद सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम अल्लाह के बंदे और रसूल है मैं इस बात से खुश हूँ कि अल्लाह मेरा रब है, इस्लाम मेरा दीन हैं और मुहम्मद सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम मेरे नबी हैं) फिर कलमे की दोनों अंगुलियों को अंदर की तरफ से चुम कर आंखों से लगा लिया। आपको ऐसा करते देखा तो अल्लाह के प्यारे रसूल ने फ़रमाया, जिसने ऐसा किया जैसा कि मेरे खलील (दोस्त) ने किया, उस पर मेरी शफ़ाअत हलाल हो गई।

हज़रत अबूल अब्बास अहमद बिन अबू बकर रूदाद यमनी अपनी किताब मुजिबाते रहमत में तहरीर फरमाते हैं की हजरत खिजर अलैहिस्सलाम फरमाते हैं, जो आदमी मुअज़्ज़िन की ज़बानी "अशहदो अन्ना मुहम्मदर रसुल्लाह सुनकर मरहबा बिहबीबी व कर्रतो ऐनी मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम" पढ़े। फिर अपने दोनों अंगूठो को चूम कर उसे अपनी आंखों से लगा ले तो उसकी आंखों में कभी तकलीफ नहीं होगी।

हज़रत फकीह मोहम्मद बिन अलबाब का बयान है कि एक बार ऐसी तेज़ हवा चली की एक कंकड़ी उड़ कर उनकी आंखों में आ लगी। उसके टुकड़े आंखों में जा घुसे। उन्हें निकालते निकालते वह थक गए। तकलीफ बढ़ती गई। इसी दौरान आपने अज़ान की आवाज़ सुनी। मुअज़्ज़िन ने जब "अशहदो अन्ना मुहम्मदर रसुल्लाह" पढ़ा तो उन्होंने वही हज़रत खिजर अलैहिस्सलाम की बताई दुआ पढ़ी। दुआ पढ़ते ही अल्लाह के करम से वह टुकड़े आपकी आंखों से निकल गए और तकलीफ दूर हो गई।  सुब्हानल्ला

इसी तरह ऐसे सैकड़ों उलेमाओं ने अपने अपने किताबों में इस अमल को जायज़ करार दिया है। अल्लाह हम सबको इस पर अमल करने की तौफीक दे। आमीन 

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