खाना खाने से लेकर सोने और जागने तक, घर से निकलने से लेकर सफर करने तक और मस्जिद में दाखिल होने से लेकर बारिश होने तक, कई ऐसे मौके हैं जिनके लिए नबी ﷺ से दुआएं और अज़कार मिलते हैं।
इस लेख में रोज़मर्रा की 12 महत्वपूर्ण दुआएं अरबी, आसान हिंदी उच्चारण और हिंदी अर्थ के साथ दी गई हैं। कोशिश की गई है कि दुआ के साथ उसका अर्थ और पढ़ने का सही मौका भी आसानी से समझ में आ जाए।
खाना खाने से पहले की दुआ
खाना शुरू करने से पहले अल्लाह का नाम लेना इस्लामी आदाब में शामिल है।
अरबी
بِسْمِ اللهِ
हिंदी उच्चारण
बिस्मिल्लाह।
अर्थ
अल्लाह के नाम से।
अगर खाना शुरू करते समय कोई व्यक्ति अल्लाह का नाम लेना भूल जाए और बाद में याद आए, तो यह कहा जाता है:
بِسْمِ اللهِ أَوَّلَهُ وَآخِرَهُ
उच्चारण: बिस्मिल्लाहि अव्वलहू व आख़िरहू।
अर्थ: अल्लाह के नाम से, इसके शुरू में भी और आखिर में भी।
खाना खाने के बाद की दुआ
खाना खाने के बाद अल्लाह का शुक्र अदा करने के लिए यह दुआ पढ़ी जाती है।
अरबी
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَطْعَمَنِي هَذَا وَرَزَقَنِيهِ مِنْ غَيْرِ حَوْلٍ مِنِّي وَلَا قُوَّةٍ
हिंदी उच्चारण
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अत्अमनी हाज़ा व रज़क़नीहि मिन ग़ैरि हौलिन मिन्नी वला क़ुव्वह।
अर्थ
तमाम तारीफें उस अल्लाह के लिए हैं जिसने मुझे यह खाना खिलाया और मेरी किसी ताकत व कुव्वत के बिना मुझे यह रोज़ी प्रदान की।
खाने के बाद अल्लाह का शुक्र करना हमें उसकी नेमतों को पहचानने और उसका शुक्र अदा करने की याद दिलाता है।
सोने की दुआ
सोने से पहले नबी ﷺ से कई अज़कार और दुआएं साबित हैं। उनमें से एक दुआ यह है:
بِاسْمِكَ اللَّهُمَّ أَمُوتُ وَأَحْيَا
हिंदी उच्चारण: बिस्मिका अल्लाहुम्मा अमूतु व अह्या।
अर्थ: ऐ अल्लाह! तेरे ही नाम के साथ मैं मरता हूं और जीता हूं।
सोने से पहले इस दुआ को पढ़ना अल्लाह की याद के साथ रात की शुरुआत करने का एक अच्छा तरीका है।
जागने की दुआ
नींद से जागने के बाद अल्लाह का शुक्र अदा करने के लिए यह दुआ पढ़ी जाती है:
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُورُ
हिंदी उच्चारण: अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अह्याना बअ्दा मा अमातना व इलैहिन्नुशूर।
अर्थ: तमाम तारीफें उस अल्लाह के लिए हैं जिसने हमें मौत जैसी नींद के बाद जिंदगी दी और उसी की ओर लौटकर जाना है।
घर में दाखिल होने के आदाब
घर में दाखिल होते समय अल्लाह का नाम लेना और घरवालों को सलाम करना इस्लामी आदाब में शामिल है।
घर में प्रवेश करते समय:
بِسْمِ اللهِ
बिस्मिल्लाह कहें और घरवालों को सलाम करें:
السلام عليكم ورحمة الله وبركاته
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुह।
अर्थ: आप पर अल्लाह की सलामती, रहमत और बरकत हो।
घर में दाखिल होते समय अल्लाह का नाम लेना और सलाम करना घर के इस्लामी आदाब में शामिल है।
घर से निकलने की दुआ
घर से बाहर निकलते समय यह दुआ पढ़ी जाती है:
بِسْمِ اللهِ، تَوَكَّلْتُ عَلَى اللهِ، لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللهِ
हिंदी उच्चारण: बिस्मिल्लाहि, तवक्कल्तु अलल्लाहि, ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह।
अर्थ: अल्लाह के नाम से। मैंने अल्लाह पर भरोसा किया। अल्लाह के अलावा न कोई ताकत है और न कोई शक्ति।
मस्जिद में दाखिल होने की दुआ
मस्जिद में प्रवेश करते समय अल्लाह से उसकी रहमत मांगने की यह दुआ पढ़ी जाती है:
اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ
हिंदी उच्चारण: अल्लाहुम्मफतह ली अबवाबा रहमतिका।
अर्थ: ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाजे खोल दे।
मस्जिद में दाखिल होते समय दाहिना पैर पहले रखना भी इस्लामी आदाब में बताया गया है।
मस्जिद से निकलने की दुआ
मस्जिद से बाहर निकलते समय यह दुआ पढ़ी जाती है:
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ
हिंदी उच्चारण: अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका मिन फज़्लिका।
अर्थ: ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फज़्ल का सवाल करता हूं।
सफर की दुआ
सफर शुरू करते समय नबी ﷺ से एक विस्तृत दुआ रिवायत हुई है। इसमें अल्लाह की पाकी बयान करने के साथ यात्रा को आसान बनाने, नेकी और तक़वा मांगने तथा सफर की परेशानियों से सुरक्षा की दुआ की जाती है।
سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ
इसके बाद दुआ पढ़े
اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْأَلُكَ فِي سَفَرِنَا هَذَا الْبِرَّ وَالتَّقْوَى، وَمِنَ الْعَمَلِ مَا تَرْضَى، اللَّهُمَّ هَوِّنْ عَلَيْنَا سَفَرَنَا هَذَا وَاطْوِ عَنَّا بُعْدَهُ، اللَّهُمَّ أَنْتَ الصَّاحِبُ فِي السَّفَرِ وَالْخَلِيفَةُ فِي الْأَهْلِ، اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ وَعْثَاءِ السَّفَرِ وَكَآبَةِ الْمَنْظَرِ وَسُوءِ الْمُنْقَلَبِ فِي الْمَالِ وَالْأَهْلِ
हिंदी उच्चारण: सुब्हानल्लज़ी सख्ख़रा लना हाज़ा वमा कुन्ना लहू मुक़रिनीन, व इन्ना इला रब्बिना लमुनक़लिबून।
अर्थ: पाक है वह अल्लाह जिसने इस सवारी को हमारे अधीन किया, जबकि हम इसे अपने वश में करने की शक्ति नहीं रखते थे और हमें अपने रब की ओर लौटकर जाना है।
इसके बाद अल्लाह से यात्रा में नेकी, तक़वा और पसंदीदा अमल की मांग की जाती है। साथ ही सफर को आसान करने और यात्रा की परेशानियों से सुरक्षा की दुआ की जाती है।
बारिश होने पर पढ़ने की दुआ
बारिश अल्लाह की एक बड़ी नेमत है। बारिश होते समय यह दुआ पढ़ी जाती है:
اللَّهُمَّ صَيِّبًا نَافِعًا
हिंदी उच्चारण: अल्लाहुम्मा सय्यिबन नाफिअन।
अर्थ: ऐ अल्लाह! इसे लाभकारी बारिश बना।
छींक आने पर क्या पढ़ें?
इस्लाम में छींक आने पर भी खूबसूरत आदाब बताए गए हैं।
छींकने वाला कहे:
الْحَمْدُ لِلَّهِ
अल्हम्दुलिल्लाह।
अर्थ: सारी तारीफ अल्लाह के लिए है।
अगर कोई दूसरा मुसलमान यह सुनता है तो वह कहे:
يَرْحَمُكَ اللهُ
यरहमुकल्लाह।
अर्थ: अल्लाह तुम पर रहम करे।
इसके जवाब में छींकने वाला कहे:
يَهْدِيكُمُ اللهُ وَيُصْلِحُ بَالَكُمْ
यहदीकुमुल्लाहु व युस्लिहु बालकुम।
अर्थ: अल्लाह तुम्हें हिदायत दे और तुम्हारे हाल को सुधार दे।
कपड़े पहनने की दुआ
कपड़े पहनते समय अल्लाह की नेमत का शुक्र अदा करने के लिए यह दुआ पढ़ी जाती है:
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي كَسَانِي هَذَا الثَّوْبَ وَرَزَقَنِيهِ مِنْ غَيْرِ حَوْلٍ مِنِّي وَلَا قُوَّةٍ
हिंदी उच्चारण: अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी कसानी हाज़स्सौब व रज़क़नीहि मिन ग़ैरि हौलिन मिन्नी वला क़ुव्वह।
अर्थ: तमाम तारीफें उस अल्लाह के लिए हैं जिसने मुझे यह कपड़ा पहनाया और मेरी किसी ताकत व कुव्वत के बिना इसे मुझे प्रदान किया।
रोज़मर्रा की दुआएं एक नजर में
- खाना शुरू करते समय: बिस्मिल्लाह
- खाना खाने के बाद: अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अत्अमनी...
- सोने से पहले: बिस्मिका अल्लाहुम्मा अमूतु व अह्या
- जागने के बाद: अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अह्याना...
- घर में दाखिल होते समय: बिस्मिल्लाह और सलाम
- घर से निकलते समय: बिस्मिल्लाहि तवक्कल्तु अलल्लाह...
- मस्जिद में प्रवेश: अल्लाहुम्मफतह ली अबवाबा रहमतिका
- मस्जिद से निकलते समय: अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका मिन फज़्लिका
- सफर शुरू करते समय: सुब्हानल्लज़ी सख्ख़रा लना हाज़ा...
- बारिश के समय: अल्लाहुम्मा सय्यिबन नाफिअन
- छींक आने पर: अल्हम्दुलिल्लाह
- कपड़े पहनते समय: अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी कसानी हाज़स्सौब...
रोज़मर्रा की दुआएं याद कैसे करें?
सभी दुआओं को एक साथ याद करना जरूरी नहीं है। बेहतर है कि इन्हें धीरे-धीरे अपनी दिनचर्या में शामिल किया जाए।
- खाना शुरू करने से पहले बिस्मिल्लाह कहने की आदत बनाएं।
- सोने और जागने की दुआ पहले याद करें।
- घर से निकलते समय दुआ पढ़ने की आदत डालें।
- मस्जिद जाने वालों को मस्जिद की दुआएं याद करनी चाहिए।
- इसके बाद सफर, बारिश, छींक और कपड़े पहनने की दुआएं याद करें।
दुआ को केवल शब्दों के रूप में याद करने के बजाय उसका अर्थ समझना भी जरूरी है। जब इंसान जानता है कि वह अल्लाह से क्या मांग रहा है, तो दुआ उसके लिए केवल याद की हुई पंक्तियां नहीं रहती, बल्कि अल्लाह से उसके संबंध और याद को मजबूत करने का माध्यम बन जाती है।
रोज़मर्रा की दुआओं की अहमियत
रोजमर्रा की दुआओं की खूबसूरती यह है कि इनके लिए अलग से बहुत समय निकालने की जरूरत नहीं होती।
हम खाना खाते हैं, सोते हैं, सुबह उठते हैं, घर से बाहर जाते हैं, सफर करते हैं, मस्जिद जाते हैं और बारिश देखते हैं। इन सामान्य गतिविधियों के साथ अल्लाह की याद जोड़ने से हमारी दिनचर्या में ज़िक्र और शुक्र के छोटे-छोटे अवसर पैदा होते हैं।
मस्नून दुआओं को केवल परेशानी के समय पढ़ने के बजाय अपनी नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रोज़मर्रा की दुआएं क्या होती हैं?
रोजमर्रा की दुआएं वे दुआएं और अज़कार हैं जिन्हें मुस्लिम व्यक्ति दैनिक जीवन के अलग-अलग मौकों पर पढ़ता है, जैसे खाना खाने, सोने, जागने, घर से निकलने, सफर करने और मस्जिद जाने के समय।
खाना खाने से पहले कौन सी दुआ पढ़नी चाहिए?
खाना शुरू करते समय “बिस्मिल्लाह” कहना चाहिए। अगर शुरुआत में अल्लाह का नाम लेना भूल जाएं तो “बिस्मिल्लाहि अव्वलहू व आख़िरहू” कहा जाता है।
सोने से पहले कौन सी दुआ पढ़ें?
सोने से पहले “बिस्मिका अल्लाहुम्मा अमूतु व अह्या” पढ़ी जाती है।
सुबह उठने की दुआ क्या है?
जागने के बाद “अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अह्याना बअ्दा मा अमातना व इलैहिन्नुशूर” पढ़ी जाती है।
घर से निकलने की दुआ क्या है?
घर से निकलते समय “बिस्मिल्लाहि, तवक्कल्तु अलल्लाहि, ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह” पढ़ी जाती है।
मस्जिद में दाखिल होने की दुआ क्या है?
मस्जिद में प्रवेश करते समय “अल्लाहुम्मफतह ली अबवाबा रहमतिका” पढ़ी जाती है। इसका अर्थ है: ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाजे खोल दे।
सफर की दुआ कौन सी है?
सफर शुरू करते समय “सुब्हानल्लज़ी सख्ख़रा लना हाज़ा...” से शुरू होने वाली दुआ पढ़ी जाती है। इसमें अल्लाह से यात्रा को आसान करने, नेकी और तक़वा देने तथा सफर की परेशानियों से सुरक्षा की मांग की जाती है।
बारिश के समय कौन सी दुआ पढ़ें?
बारिश के समय “अल्लाहुम्मा सय्यिबन नाफिअन” पढ़ी जाती है, जिसका अर्थ है: ऐ अल्लाह! इसे लाभकारी बारिश बना।
छींक आने पर क्या कहना चाहिए?
छींकने वाला “अल्हम्दुलिल्लाह” कहता है। सुनने वाला “यरहमुकल्लाह” कहता है और छींकने वाला जवाब में “यहदीकुमुल्लाहु व युस्लिहु बालकुम” कहता है।
क्या रोजमर्रा की दुआएं अरबी में पढ़ना जरूरी है?
मस्नून दुआओं को उनके मूल अरबी शब्दों में सीखना बेहतर है। हिंदी उच्चारण शुरुआत में मदद कर सकता है, लेकिन सही अरबी उच्चारण सीखने की कोशिश करनी चाहिए।
निष्कर्ष
रोजमर्रा की जिंदगी में अल्लाह को याद करने के लिए किसी खास जगह या लंबे समय की जरूरत नहीं होती।
खाने की शुरुआत, सोने से पहले, सुबह जागने पर, घर से निकलते समय, सफर के दौरान, मस्जिद में जाते समय या बारिश होने पर—हर अवसर अल्लाह को याद करने का मौका बन सकता है।
इन दुआओं को केवल पढ़ने के बजाय उनका अर्थ समझकर, सही उच्चारण के साथ और अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर पढ़ना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
अल्लाह हमें कुरआन और सुन्नत के मुताबिक जिंदगी गुजारने और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में ज्यादा से ज्यादा ज़िक्र और दुआ करने की तौफीक दे। आमीन।
लेखक के बारे में
Islamilm.in Editorial Team
Islamilm.in Editorial Team इस्लाम, कुरआन, हदीस, दुआ और रोजमर्रा के इस्लामी जीवन से जुड़े विषयों पर सरल हिंदी में उपयोगी और शोध-आधारित जानकारी प्रस्तुत करती है।
हमारा प्रयास है कि धार्मिक विषयों से जुड़ी जानकारी को स्पष्ट, जिम्मेदार और पाठकों के लिए आसान भाषा में प्रस्तुत किया जाए। दुआओं और हदीस से संबंधित सामग्री तैयार करते समय प्राथमिकता कुरआन और विश्वसनीय हदीस स्रोतों को दी जाती है।

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