हज इस्लाम का एक पवित्र स्तंभ है। जहाँ पुरुष और महिलाएँ समान रूप से इस यात्रा को पूरा करते हैं, वहीं महिलाओं की शारीरिक विशिष्टताओं और शरीयत के नियमों के कारण उनके लिए कुछ विशेष मसाइल (नियम) जानना अनिवार्य है।
इस आर्टिकल में नबी अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की तालीमात के आधार पर उन सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है जो हर हाजी महिला के लिए मार्गदर्शक हैं।
हज की अनिवार्यता और सफर की शर्तें
- हज का फर्ज होना: यदि कोई महिला आर्थिक और शारीरिक रूप से सक्षम है, तो उस पर हज फर्ज है।
- महरम की अनिवार्यता: बिना महरम (पति या करीबी रिश्तेदार) के हज का सफर करना जायज नहीं है। बिना महरम हज करने पर हज तो अदा हो जाएगा, लेकिन सफर करना बड़ा गुनाह है।
- पाकीजगी और गुसल: एहराम से पहले गुसल करना सुन्नत है, चाहे महिला नापाकी (हैज़) की हालत में ही क्यों न हो।
- एहराम का लिबास: महिलाओं के लिए कोई विशेष एहराम नहीं है। वे सामान्य सिले हुए कपड़े पहनें और एहराम की नियत करें।
- माहवारी में एहराम: यदि एहराम के वक्त माहवारी हो, तो गुसल करें, नमाज न पढ़ें, बस नियत करके धीरे से तलबीया पढ़ें।
- कपड़ों की तब्दीली: महिलाएं एहराम के दौरान कपड़े बदल सकती हैं। बस वे बहुत अधिक सजावटी या चमकीले न हों।
एहराम में पर्दे के नियम
- पर्दे का एहतमाम: एहराम में चेहरा ढका नहीं जाना चाहिए (कपड़ा खाल से न छुए), लेकिन गैर-महरम के सामने आने पर सिर से कपड़ा इस तरह लटका लें कि वह चेहरे को टच न करे।
- सिर का रुमाल: बालों को झड़ने से बचाने के लिए सिर पर रुमाल बांधना जायज है, लेकिन वजू के वक्त इसे खोलकर सर का मसह करना फर्ज है।
- माहवारी (हैज़) के दौरान हज के अरकान
- मक्का आगमन: यदि मक्का पहुंचते ही माहवारी हो, तो पाक होने तक इंतजार करें, फिर उमराह या तवाफ करें।
- जिलहिज्जा की पाकी: यदि 8 जिलहिज्जा तक पाक न हो सकें, तो बिना उमराह किए सीधे मिना चली जाएं और हज के अरकान शुरू करें।
- तवाफ की मनाही: माहवारी में तवाफ के अलावा हज के सारे काम (मिना, अरफात, मुजदल्फा) किए जा सकते हैं।
- सई का नियम: यदि तवाफ के बाद माहवारी शुरू हो, तो सफा-मरवा की सई की जा सकती है, क्योंकि इसके लिए मस्जिद में होना शर्त नहीं है।
- जिक्र व अज़कार: नापाकी में कुरान की तिलावत मना है, लेकिन जिक्र और दुआएं करना मुस्तहब (बेहतर) है।
- तवाफ के बीच नापाकी: यदि तवाफ के दौरान खून शुरू हो जाए, तो फौरन तवाफ रोककर मस्जिद से बाहर आ जाएं।
तवाफ और सई के विशेष निर्देश
- रमल की मनाही: तवाफ में 'रमल' (अकड़ कर चलना) महिलाओं के लिए नहीं है।
- हजरे-असवद: भीड़ में काला पत्थर चूमने की कोशिश न करें, दूर से इशारा करना काफी है।
- मकामे-इब्राहिम: भीड़ होने पर तवाफ की दो रकात नमाज मस्जिद में कहीं भी पढ़ लें।
- सई में दौड़ना: हरी लाइटों के बीच पुरुषों की तरह दौड़ना महिलाओं के लिए मना है।
- दूरी बनाए रखना: तवाफ और सई में पुरुषों के झुंड से दूर रहने की कोशिश करें।
- तवाफ का समय: भीड़ कम होने पर ही तवाफ के लिए जाएं।
- नफली उमराह: महिलाएं अपने परिजनों की तरफ से नफली उमराह कर सकती हैं।
- तलबीया की आवाज: तलबीया हमेशा धीमी आवाज में पढ़ें।
मिना, अरफात और मुजदल्फा के मसाइल
- नमाज का स्थान: मिना, अरफात और मुजदल्फा में नमाजें अपने खेमे (टेंट) में ही अदा करें।
- वुकूफ-ए-अरफात: खेमे में रहकर किबला रुख होकर खूब दुआएं करें, दुनियावी बातों से बचें।
- मुजदल्फा की नमाज: यहाँ मगरिब और ईशा की नमाज एक साथ ईशा के वक्त में पढ़ें।
- मुजदल्फा से जल्दी रवानगी: वृद्ध और महिलाओं को अनुमति है कि वे भीड़ से बचने के लिए आधी रात के बाद मिना चली जाएं।
- रमी (कंकड़ियां मारना): महिलाएं रात के समय भी कंकड़ियां मार सकती हैं ताकि भीड़ से बच सकें।
- खुद रमी करना: बिना किसी बड़ी बीमारी के दूसरे से कंकड़ियां न मरवाएं, भीड़ कम होने पर खुद जाएं।
तवाफे-ज़ियारत और विदाई
- नापाकी में तवाफे-ज़ियारत: माहवारी में यह तवाफ कभी न करें, वरना 'बुदना' (बड़े जानवर की कुर्बानी) देनी होगी।
- पाक होकर दोबारा तवाफ: यदि नापाकी में तवाफ किया था लेकिन पाक होकर दोबारा कर लिया, तो कुर्बानी माफ है।
- समय और देरी: तवाफे-ज़ियारत 12 जिलहिज्जा तक करना होता है, लेकिन माहवारी की वजह से देरी होने पर कोई जुर्माना नहीं है।
- वैवाहिक संबंध: तवाफे-ज़ियारत और सई तक पति-पत्नी के खास संबंधों से दूर रहना अनिवार्य है।
- फौरन तवाफ कर लेना: यदि माहवारी शुरू होने का डर हो, तो समय मिलते ही तवाफे-ज़ियारत कर लें।
- तवाफे-विदा: मक्का से वापसी के समय यदि महिला नापाक हो, तो विदाई का तवाफ उस पर माफ है।
अन्य विशेष परिस्थितियां
- निफास के नियम: बच्चे की पैदाइश के बाद आने वाले खून के नियम भी माहवारी की तरह ही हैं।
- इस्तेहाज़ा (बीमारी का खून): इस हालत में महिला हर नमाज के लिए नया वजू करे और नमाज-तवाफ दोनों कर सकती है।
- दवा का इस्तेमाल: माहवारी रोकने के लिए डॉक्टर की सलाह से दवा लेना शरीयत में जायज है ताकि हज के अरकान पूरे हो सकें।
- जनाज़ा नमाज: हरम शरीफ में होने वाली जनाजे की नमाज में महिलाएं भी शामिल हो सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- क्या महिलाएं एहराम में नकाब पहन सकती हैं?
हाँ, नकाब पहन सकती हैं, लेकिन कपड़ा चेहरे की खाल से नहीं टकराना चाहिए। इसके लिए विशेष कैप वाली नकाब का इस्तेमाल किया जा सकता है। - बिना तवाफे-ज़ियारत किए घर लौट आए तो क्या होगा?
हज मुकम्मल नहीं होगा और वैवाहिक संबंध तब तक हराम रहेंगे जब तक वापस जाकर तवाफ न कर लिया जाए। - क्या नापाकी की हालत में दुआएं मांग सकते हैं?
जी हाँ, नापाकी की हालत में दुआएं, तस्बीह और जिक्र करना न केवल जायज है बल्कि बहुत ही पुण्य (सवाब) का काम है।
निष्कर्ष: महिलाओं के लिए हज का सफर सब्र, जानकारी और इबादत का संगम है। इन नियमों का पालन करने से न केवल आपकी यात्रा आसान होगी, बल्कि आपकी इबादत भी मुकम्मल होगी। अल्लाह आपकी हज यात्रा को कुबूल फरमाए। आमीन!
